Proper way of Bathing – Believe it or not – नहाने का वैज्ञानिक तरीका मानो या न मानो, मर्जी आपकी

और और Proper way of Bathing – Believe it or not – नहाने का वैज्ञानिक तरीका मानो या मानो, मर्जी आपकी

Proper way of Bathing – सर्दियों (bathing in winter) में नहाना, बच्चों और बुजुर्गों के लिये जानलेवा हो सकता है.!

जानिये, नहाने का वैज्ञानिक (scientific) तरीका..!

अपने स्वस्थ एवं सुरक्षित (health and safety) जीवन के लिये इस article को पढे भी और पढ़ायें भी.!

क्या आपने कभी अपने आस पास देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग (old) को लकवा लग गया?

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दिमाग की नस फट गई, ब्रेन हेमरेज या हार्ट अटैक (heart attack) आ गया.!

जरा याद कीजिये कि आपका छोटा बच्चा नहाते (small child) समय या तो बहुत कांपता रहता है या फिर डरता (fear) है पर उसकी मां समझती है कि वो नहाने से डर (afraid of bathing) रहा है।

ऐसा कुछ भी नही है; असल मे ये सब गलत तरीके (bad way of bathing) से नहाने से होता है।

दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत शक्ति रुधिर (blood- खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होती रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा (natural side starts from up) ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है।

सिर में बहुत महीन रक्त नालिकाये (blood vessels) होती है जो दिमाग तक खून पहुँचाती है।

यदि कोई व्यक्ति लगातार सीधे सिर में ठंडा (cold water) पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने (shrink) लगती हैं और रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं और जब शरीर इनको सहन नहीं (Cant bear) कर पाता तो ऐसी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो (old persons) के साथ होती है।

सिर पर सीधे पानी (straight water on head) डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त (blood) भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक (heart attack) या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है।

ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण (control) तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के कांपने (shivering) से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है और मां समझती है कि बच्चा डर रहा है।

गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक (increase heart beat) बढ़ जाती है स्वयं कऱके देखिये।

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तो जानिये, नहाने (proper way of bathing) का सही तरीका.!

बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पानी पैर के पंजो (feet) पर डालिये,

फिर रगड़िये,

फिर पिंडलियों पर,

और फिर घुटनो (knee) पर,

फिर जांघो पर पानी डालिये

और हाथों से मालिश करिये,

फिर हाथो से पानी लेकर (rub the stomach) पेट को रगड़िये,

और फिर कंधो पर पानी डालिये,

फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह (mouth) पर मलिए,

हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए।

इसके बाद आप शावर के नीचे (below shower) खड़े होकर या बाल्टी सिर पर उड़ेलकर नहा सकते है।

इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है, लेकिन इससे जीवन की रक्षा (life safety) हो सकती है।

क्योंकि इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत (electricity in body) प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है अर्थात विद्युत को आकर्षित (attract) करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डालते है।

बच्चे को भी इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल (never shiver and fear) कांपता और डरता नहीं है।

इस प्रक्रिया में शरीर की गर्मी पेशाब (through urine) के रास्ते बाहर आ जाती है आप कितनी भी सर्दी में नहाये, कभी भी जुखाम बुखार (cough or fever) नहीं होगा।

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