क्या है मानसिक रोग और क्या है इसके लक्षण, कारण और प्रकार – What is Mental Disease, Symptoms, Reasons and Types

क्या है मानसिक रोग और क्या है इसके लक्षण, कारण और प्रकार – What is Mental Disease, Symptoms, Reasons and Types

हमारे शरीर (body) से कहीं ज्यादा अधिक जटिल हमारा मन होता है। शायद यही कारण (reason) है के हम अपने मन को समझने में अकसर (normally) भूल करते हैं। हम शरीर के दर्द को तो आसानी से समझ (understand) लेते हैं और हम उस दर्द का जल्द ही इलाज भी शुरू कर देते हैं, लेकिन मन के दर्द को हम अक्सर नजरअंदाज (ignore) कर देते हैं, और जब हम तक मन के दर्द को महसूस (feel) करते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। और वो किसी न किसी मानसिक रोग (mental disease) में बदल चुकी होती है और हमारा व्यवहार सामान्य से असामान्य (abnormal) हो जाता है और हमे पता भी नहीं चलता| धीरे-धीरे हमारे आसपास के लोग हमे इन बदलावों (changes) के बारे में बताने लगते है, पर हम उनका यकीन ना करते हुए ज्यादातर उनकी बातो को अनदेखा (ignore) कर देते है |

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आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी (busy life) में हमारे पास मन को समझने का समय भी नहीं होता। आज की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और व्यस्त होती दिनचर्या (daily routine) में भावनाओं तथा संवेदनाओं को समझने की चेष्टा भला कौन करता है?  वैसे तो यह समस्याएँ (problems) पहले भी थीं, लेकिन उन समस्याओं का सामना करने में हर व्यक्ति को समाज से सहयोग (help) मिलता रहता था। पर आज इस सहयोग का आभाव है, खासतौर से शहरी जीवन (city life) में इसकी बहुत कमी है, ऐसे में आज मानसिक तनाव, डिप्रेशन, एंग्जाइटी, स्किजोफ्रेनिया आदि मानसिक बीमारियाँ (mental disease) बहुत ही तेजी (growing rapidly) से बढ़ रही हैं।

चिकित्सा विज्ञान (medical science) के क्षेत्र में हुई प्रगति से आजकल ज्यादातर मानसिक रोग (mental disease)जैसे (एंग्जाइटी), डिप्रेशन, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, स्किजोफ्रेनिया आदि का उपचार संभव हो चूका है। अगर मानसिक रोगियो को सही समय पर इलाज (tretament) दिया जाए तो वह भी सामान्य जीवन बिता सकते हैं।

जीवन में केवल शारीरिक सुंदरता (physical beauty) और अच्छा स्वास्थ्य ही जरुरी नहीं होता है हैं बल्कि एक स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मानसिक संतुलन (mental balance) का होना भी बहुत जरुरी होता है, इसलिए आपको मानसिक बीमारियों (mental disease) के प्रति जागरूक बनाने के लिए हम इस पोस्ट को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित (publish) कर रहे है और आगे भी समय-समय पर इस जरुरी विषय पर हम लिखते रहेंगे,  और हमे विश्वास है के यह प्रयास लोगों में मानसिक बीमारियों (mental disease)के बारे में समझ बनाने में, उनका मुकाबला करने में और मानसिक रोगियों (mental disease patients) के प्रति समाज में फैले अंधविश्वासों को दूर करने में अत्यंत मददगार (very helpful) साबित होगा ।

मानसिक रोग के मुख्य कारण : Main reason of Mental Diseases

मन की गुत्थियों को समझना किसी के लिए भी आसान (not easy) नहीं है। यह किसी को नहीं पता के हमारा मन कब किस बात से आहत हो जाए और  मानसिक रोग (mental disease) से घिर जाए, कहना मुश्किल है। कौन व्यक्ति किस बात से या स्थिति के कारण मानसिक तनाव (stress) या फिर दुःख से पीडित हो सकता है, यह बताना बहुत कठिन (very diffuclt) है। कोई बात किसी के दिमाग को गहराई तक भी भेद सकती है, लेकिन वही बात किसी ओर इंसान के (normal for other) लिए मामूली सी हो सकती है।

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मानसिक रोग के मुख्य कारण ये होते हैं –  Main Reasons of Mental Disease

आपसी संबंधों (personal relations) में बढ़ता तनाव, किसी प्रिय व्यक्ति का गुजरन जाना, सम्मान को ठेस लगना, काम में भारी नुकसान होना, शादी (marriage), नशा, तलाक, एक्जाम या प्यार में असफलता इत्यादि ही मानसिक रोग (mental disease) के कारण बन सकते हैं।

कोई इंसान किसी दुर्घटना (Accident) या किसी अपने की अकाल मृत्यु के कारण सदमे से भी मानसिक रोग में घिर सकता है या हमेशा के लिए अपना मानसिक संतुलन (mental balance) खो सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति ऐसे भी होते है जो इस दुःख को आराम से झेल भी जाता है। निश्चित ही किसी इंसान (person) का मानसिक रूप से दुखी होना उसकी मानसिक रूप से मजबूती (mentally strong) एवं मनोवृति पर ही निर्भर होता है, लेकिन कई बार कुछ परिस्थितियाँ (situations) एवंम वातावरण भी मानसिक बीमारी (mental disease) का कारण बन जाते हैं।

मानसिक बीमारियाँ (mental disease) आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के शुरू (early years) के वर्षो में, खासकर किशोरावस्था में या युवावस्था, में उन्हें अपना शिकार (victim) बनाती हैं। हालाँकि इस बीमारी से कोई भी किसी भी वक़्त प्रभावित (affected) हो सकता है, लेकिन ज्यादातर युवा और बूढ़े लोग ही इनसे सबसे अधिक प्रभावित (affected) होते हैं।

आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के तौर-तरीकों में आए ढेर सारे बदलावों (changes) के कारण लोगों को आजकल सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। शहरीकरण, संयुक्त परिवार (families) में बिखराव और युवाओं के रोजगार की तलाश में गाँव से शहर (from village to cities) आने के कारण भी होने वाले संघर्ष से मानसिक समस्याएँ (mental disease) आजकल बहुत बढ़ रही हैं।

पुरुषों की तुलना (comparatively) में महिलाओं में यह मानसिक बीमारियाँ दो से तीन गुना तक अधिक पाई जाती है इसके प्रमुख कारण (main reasons) है महिलाओ में आत्मविश्वास की कमी (lack of confidence), समाज और घर- परिवार में उन्हें सम्मान न मिलने, उनके आत्म केंद्रित स्वभाव के कारण, घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार (bad behavior) के कारण भी महिलाएँ डिप्रेशन का शिकार ज्यादा होती हैं।

बेरोजगारी, निर्धनता, घर परिवार की समस्याएँ (family problems) और शारीरिक अस्वस्थता भी डिप्रेशन को और बढ़ाती हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति (financial problems)  बुरी होती जाती है वैसे-वैसे वह मानसिक रोग (mental disease) की और अग्रसर होता रहता है, जो अंत में बहुत बढ़ जाती है.

मानसिक रोग (mental disease) के आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं जैसे के मंदबुद्धि होना, मिर्गी रोग उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलते हैं, जिनके परिवार (family background) में इसका पहले से कोई इतिहास रहा हो, ऐसे लोगो के बच्चो को इन बीमारियों का खतरा (risk of diseases) सामान्‍य लोगों के मुकाबले लगभग दोगुना हो जाता है।

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मानसिक बीमारियाँ या मानसिक रोग और उनके लक्षण : Mental Diseases and Symptoms

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर– Acute Stress Disorder

 यह एक सदमे (shock) की स्थिति है, जो किसी दुर्घटना के बाद पैदा हो सकती है और दो से चार सप्ताह तक रह भी सकती है। इस मानसिक रोग (mental disease) में रोगी अपने आप को डरा हुआ और असहाय महसूस करने लगता है। उसके बाद वह सबसे अलग-थलग रहने लगता है, और किसी पर विश्वास (trust) नहीं करता और उसकी याद रखने की ताकत भी अन्य लोगो के मुकाबले कम (comparatively less) हो जाती है। इस दौरान उसमें एंग्जाइटी के भी लक्षण (symptoms) दिखाई देते हैं। और वह खुद को और अन्य लोगों को भी नुकसान पहुँचा सकता है और आत्महत्या (suicide0 की कोशिश भी कर सकता है। अगर समय पर इसका उपचार (treatment) हो जाए तो यह रोग ठीक हो जाता है।

लत-संबंधी बीमारियाँ (एडिक्टिव डिसऑर्डर) – Addictive Disorders

ये बीमारी शराब (alcohol), सिगरेट या अन्य मादक पदाथों के प्रति अत्यधिक लगाव या इन चीजो का प्रति लत (habit) पैदा होने के कारण होने वाली समस्याएँ हैं। इस मानसिक रोग (mental disease) में रोगी हमेशा खुद को बैचैन महसूस (feel) करता है, और उसका शरीर कापने लगता है, और नींद की कमी (lack in sleep) के कारण उसका स्वभाव चिडचिडा हो जाता है |

समायोजन संबंधी बीमारियाँ (एडजस्टमेंट डिसऑर्डर) – Adjustment Disorder

ये ज़िन्दगी में बदली हुई परिस्थितियों (situations) के साथ तालमेल नहीं बिठा पाने के कारण उत्पन्न एक मानसिक समस्या हैं। यह समस्याएँ (problems) छोटे बच्चों और किशोरों की तुलना में युवाओं में कम होती हैं और आमतौर पर यह प्रॉब्लम छह महीने (six months) से अधिक नहीं रहतीं। ये समस्याएँ किन्हीं अन्य प्रॉब्लम पैदा करने वाली परिस्थितियों (situation) में, कम से कम तीन महीने तक तनाव में रहने पर रोगी (patient) इस बीमारी से पीडित हो जाता है और पीड़ित इंसान सामान्य परिस्थितियों (other situation) में भी असामान्य व्यवहार करने लगता है।

एंग्जाइटी डिसऑर्डर- Anxiety Disorder

यह बहुत ही सामान्य सा मानसिक रोग (mental disease) है। इसका इलाज संभव है, लेकिन दुर्भाग्यवश इस बीमारी के एक चौथाई रोगी का सही इलाज नहीं (no right treatment) हो पाता। इसके लक्षणों में घबराहट, दिल की धड़कन का तेज होना, ज्यादा पसीना आना, आत्मविश्वाश की कमी होना (lack of confidence), बैचैनी और किसी काम में मन नहीं लगना और नींद की कमी (lack of sleep) होती है|

बाल मनोवैज्ञानिक बीमारियाँ (चाइल्डहुड डिसऑर्डर)- (Childhood Disorder )

जब बच्चे मानसिक तनाव (mental disease) से या भावनात्मक डिसऑर्डर से पीडित हो जाते हैं तो उनके माता-पिता इसके लिए बच्चों (children) को ही दोषी ठहराते हैं जबकि इसके लिए कई अन्य कारण जिम्मेदार होते हैं। इसके इलाज से बच्चे का फिर से स्वस्थ मानसिक (mental growth) विकास संभव होता है।

अल्झाइमर –  (Alzheimer’s Disease )

अधिक उम्र के लोगों में अपंगता होने का मुख्य कारण अल्जाइमर (Alzheimer) रोग है। एक अनुमान के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक उम्र के हर 20 में से एक व्यक्ति (person) तथा 80 वर्ष से अधिक के हर पाँच में से एक अल्जाइमर रोग से पीडित (affected) होता ही होता है। इस मानसिक रोग (mental disease) में इंसान की याददाश्त बहुत कमजोर (weak memory) हो जाती है| इसके अन्य लक्षणों में क्रोध, उदासीनता, सामान्य असंतोष, अकेलापन, या मूड बदलते (changes in mood) रहना होता है|

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कॉगनिटिव डिसऑर्डर- Cognitive Disorder

इन मानसिक बीमारी (mental disease) में पीड़ित इंसान को सोचने-समझने वाले कार्य करने में दिक्कत (problem) होती है।

संवाद संबंधी डिसऑर्डर-

ठीक से बोल ना पाना और घोर आत्मविश्वास की कमी (lack of confidence) अथवा अपने आप की अभिव्यक्ति में दिक्कत होना|

डिप्रेसिव डिसऑर्डर- Depressive Disorder

यह एक बहुत ही सामान्य मानसिक रोग (mental disease) है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। हर पाँच में से एक महिला और दस में से एक पुरुष कभी-न-कभी इस डिप्रेशन (depression) से पीडित होते हैं। डिप्रेशन के 90 प्रतिशत रोगियों का इलाज होना संभव (treatment is possible) होता है। इसके मुख्य लक्षण है – चिंता, उदासीनता, असंतोष, अपराधिक गतिविधियों में रुचि, निराशा, अकेलापन, खुशी की कमी, उदासीनता या भावनात्मक संकट, रोना, चिड़चिड़ापन (irritation), बेचैनी, थकान, सामाजिक अलगाव, अत्यधिक भूख का लगना या बिलकुल भूख ना लगना, और अधिक नींद (taking more sleep) आदि |

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर- Development Disorder

ये मानसिक विकास (mental growth) को प्रभावित करने वाली बीमारी हैं।

(डी.आई.डी.)- Dissociative Identity Disorder (DID)

इस बीमारी को ‘मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर’ भी कहते हैं। यह बीमारी (disease) आमतौर पर बचपन के किसी मानसिक आघात के कारण से होती है। इसमें रोगी अपनी अलग पहचान (different personality) बना लेता है। वह अपने विचार, सोच, सोचने का तरीका, उद्देश्य सबसे अलग छुपाकर रखता है।

ईटिंग डिसऑर्डर- Eating Disorder

महिलाएँ, खासकर यंग किशोरियाँ (young girls) और युवा महिलाएँ,  स्लिम दिखने की चाहत में खाने पीने की गलत आदतों (bad habits) को अपना लेती हैं, जिससे किशोरिया ईटिंग डिसऑर्डर (eating disorder) का शिकार हो जाती हैं। ऐसे में जरुरत से ज्यादा डाइटिंग (dieting) करने से शरीर में कई प्रकार के विटामिन की कमी हो जाती है |

मूड डिसऑर्डर –  Mood Disorder

कठिन परिस्थितियों (hard situations) में उदास होना और हतोत्साहित होना, यह सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया है। लेकिन जब ऐसे लक्षण (symptoms) किसी में एक सप्ताह से अधिक समय तक रहें तो ये मूड डिसऑर्डर के ही लक्षण (symptoms) होते हैं। इसका बीमारी का उपचार किया जाना बेहद जरूरी (very important) होता है।

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पैनिक डिसऑर्डर- Panic disorder

इंसानों में इस मानसिक रोग (mental disease) के लक्षण एंग्जाइटी डिसऑर्डर से मिलते हैं, लेकिन यह सामान्य एंग्जाइटी (anxiety) से बिलकुल भिन्न है। दूसरे एंग्जाइटी डिसऑर्डर में रोगी को सर्वनाश होने की चिंता बनी रहती है, जबकि पैनिक डिसऑर्डर (panic disorder) में रोगी को अचानक आक्रमण होने का डर बना होता है। इस कारण रोगी (patient) चिंतित रहता है और उसके व्यवहार में तथा दैनिक क्रिया-कलाप में काफी परिवर्तन (changes) आ जाता है.

फोबिया- Phobia

किसी खतरे का अंदेशा होने पर डर का होना स्वाभाविक (natural) है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति का डर इतना ज्यादा बढ़ जाए के उसके कारण उसकी दिनचर्या प्रभावित (affected daily routine) होने लगे तो वह फोबिया का शिकार हो सकता है। फोबिया सभी मानसिक बीमारियों (mental disease) में सबसे सामान्य है। इसका इलाज सफलतापूर्वक (successfully) किया जा सकता है।

सब्सटांस एब्यूज- Substance Abuse

यह बीमारी आज के समय में यह समाज (society) की सबसे सामान्य समस्या है। आज के माहोल में सही या गलत का निर्णय (decision) लेना हर व्यक्ति के लिए गंभीर समस्या है। किसी भी मामले में गलत निर्णय (wrong decision) लेने से इंसान का जीवन प्रभावित हो सकता है।

लेट लाइफ डिप्रेशन- Late Life Depression

वृद्धों लोगो में डिप्रेशन एक मानसिक रोग (mental disease) है। 65 वर्ष से अधिक उम्र के 20 प्रतिशत से अधिक लोग किसी-न-किसी हद तक डिप्रेशन (depression) से पीडित होते हैं। इसके अलावा डिमेंसिया से पीडित 10 प्रतिशत वृद्धों के भी डिप्रेशन से पीडित होने की आशंका (possibility) होती है। युवावस्था में मानसिक स्वास्थ्य खराब होने से और उसका इलाज (treatment) करा लेने का अर्थ यह नहीं है के वह व्यक्ति बाद में मानसिक बीमारी से पीड़ित नहीं हो सकता. वृद्धावस्था में भी कोई व्यक्ति मानसिक रोग (mental disease) से पीडित हो सकता है। लेकिन इसके ठीक से उपचार और देखभाल से इसके लक्षणों (symptoms) को कम या खत्म किया जा सकता है।

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लेट लाइफ सुसाइड- Late Life Suicide

कई लोग अधिक उम्र (old age) होने पर या नौकरी के दौरान जो ऐच्छिक कार्य वे नहीं कर पाते हैं, वह रिटायर होने के बाद अपनी जिंदगी से संतुष्ट (satisfied with life) रहते हैं। लेकिन वृद्धावस्था में कई लोगों की जिंदगी अत्यंत दर्दनाक होती है, इसलिए ऐसे व्यक्ति में किसी मानसिक रोग (mental disease) होने से आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं।

मैनिक डिप्रेसिव डिसऑर्डर– Manic Depressive Disorder

मैनिक डिप्रेशन को चिकित्सकीय शब्दावली में ‘बाईपोलर डिसऑर्डर’ (bipolar disorder) कहते हैं। यह एक बहुत ही गंभीर मानसिक रोग (mental disease) है। एक अनुमान के अनुसार, 1 प्रतिशत व्यक्ति मैनिक डिप्रेशन से पीडित (affected) होते हैं। यह आमतौर पर पैंतीस साल की उम्र से पहले ही होता है। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार से होते हैं – कुछ ना होने की भावना , थकान (laziness and fatigue) या कम ऊर्जा होना, एकाग्रता की कमी होना, निर्णय लेने में समस्या आना.

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर- Obsessive Compulsive Disorder

यह मानसिक रोग (mental disease)  किसी भी उम्र में कभी भी सकता है। इसका निदान संभव है, जिसके बाद रोगी फिर से सक्रिय जीवन (active life) जी सकता है।

स्किजोफ्रेनियाSchizophrenia

यह सामान्य मानसिक रोग (mental disease) नहीं है। इससे आमतौर पर प्रति एक लाख लोगों में से 150 लोग प्रभावित होते हैं। यह रोग इंसान (person) को आमतौर पर किशोरावस्था या युवावस्था के दौरान होता है। समाज (society) से दूरी बनाना, चिंता, भ्रम, दु: स्वप्न, पागलपन की भावना या उत्पीड़न की भावनाएं, या फिर शरीर की स्वच्छता पर ध्यान ना देना, भूखे रहना, अकेले में बडबडाना, हिंसक व्यवहार (aggressive behavior) आदि इसमें शामिल है.

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किशोरावस्था में आत्महत्या (टीन सुसाइड)- Teen Suicide

किशोरावस्था जिंदगी का सबसे कठिन दौर (hard stage of life) होता है। इस समय शरीर में बहुत बदलाव आते हैं, लोगो से संबंध जटिल (difficult to maintain relations) हो जाते हैं। वे (किशोर) सामाजिक भूमिका को समझने लगते हैं और जल्द-से-जल्द बड़े होना चाहते हैं। ये परिवर्तन (changes) और चाहत किशोरों को असहाय, अति संवेदनशील, भ्रमित और निराशावादी बना देते हैं।

इन सबके बीमारियों (diseases) के अलावा और भी बहुत सारे गम्भीर मानसिक रोग (mental disease) होते है, लेकिन पक्के तौर पर यह कहना की ये लक्षण इस मानसिक रोग के है, यह बिना मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counseling) के लिए भी बहुत मुश्किल (difficult) होता है | क्योंकि सधारांत सभी मानसिक रोगों के लक्षण मिलते-जुलते से ही होते हैं | Counseling की प्रक्रिया मानसिक रोग को Diagnose की एक वैज्ञानिक विधि (scientific treatment) है जो एक प्रशिक्षित मानसिक रोग विशेषज्ञ Psychiatrist Doctor द्वारा की जाती है| इसके बाद इस बीमारी का इलाज (treatment of disease starts) प्रारम्भ किया जाता है |

तो दोस्तों, इस पोस्ट में इतना ही, जल्दी आयेंगे इन मानसिक बीमारियों के इलाज को लेकर, धन्यवाद्.

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