इन 20 घरेलु नुस्खो से करे टांसिल का घर में ही इलाज| 20 Home Remedies For Swollen Tonsils

इन 20 घरेलु नुस्खो से करे टांसिल का घर में ही इलाज| 20 Home Remedies For Swollen Tonsils

 

गले के प्रवेश द्वार (ENTRY POINT) के दोनों तरफ मांस की एक गांठ सी होती है, जो लसिका ग्रंथि के समान होती है जिसे टांसिल (tonsils) कहते हैं। 

गले में छोटे-छोटे गोल कृत (गोल आकार के- round shape) मांसल तन्तु टॉन्सिल कहलाते हैं। इनमें पैदा होने वाले शोथ (सूजन- swelling) को टाँन्सिलाइटिस कहा जाता है।  

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टांसिल बढ़ने का कारण : Reason of Tonsils

 –  मैदा, चावल, आलू, चीनी (sugar) , ज्यादा ठंडा, ज्यादा खट्टी चीजों का जरूरत से ज्यादा (more usage) प्रयोग करना टांसिल (tonsils) के बढ़ने का (main reason) मुख्य कारण है।

 –  ये सारी चीजें अम्ल (gas – गैस) बढ़ा देती है। जिससे कब्ज की शिकायत (problem of constipation) बढ़ जाती है।

 –  सर्दी (cold) लगने की वजह से भी टांसिल (tonsils) बढ़ जाते हैं।

 –  खून की अधिकता, मौसम का अचानक (sudden change in atmosphere) बदल जाना जैसे गर्म से अचानक ठंडा हो जाना, आतशक (गर्मी), हवा का बुखार, दूषित वातावरण (polluted atmosphere) में रहने से तथा खराब दूध पीने से भी टांसिल (tonsils) बढ़ जाते हैं।

 

टांसिल के लक्षण : Symptoms of Tonsils

 –  गले में सूजन, दर्द (pain), बदबूदार सांस, जीभ पर मैल, सिर में दर्द (headache), गर्दन के दोनों तरफ लसिका ग्रंथियों का बढ़ जाना और उन्हें दबाने से दर्द होना, सांस लेने में परेशानी (problem in taking oxygen) होना, आवाज का बैठ जाना, हरदम बैचेनी होना और सुस्ती (symptoms of laziness) आदि के लक्षण दिखाई देते हैं।

 –  इस रोग (disease) के होते ही ठंड लगने के साथ बुखार (fever) भी आ जाता है, गले पर दर्द के मारे हाथ नहीं रखा जाता और थूक निगलने (swelling spit) में तकलीफ महसूस होती है।

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भोजन और परहेज :Food to Avoid in Tonsils

 –  इस रोग में दूध (milk), रोटी, खिचड़ी, तोरई और लौकी का पानी, नींबू का पानी (lemon water), अनन्नास का रस, मौसंबी का रस और आंवले की चटनी का सेवन करना चाहिए।

 –  भोजन में बिना नमक की उबली (boiled vegetables) हुई सब्जियां खाने से टांसिल (tonsils) में जल्दी आराम आ जाता है।

 –  मिर्च-मसाले (spicy food) से बने भोजन, ज्यादा तेल की सब्जी, खट्टी चीजें और तेज पदार्थों का सेवन नहीं (Avoid eating) करना चाहिए।

 –  मूली, टमाटर (tomato), गाजर और पालक आदि सब्जियों (vegetables) का सेवन नहीं करना चाहिए।

 

विभिन्न औषधियों से टांसिल का उपचार : Treatment of Tonsils from various Herbs

  1. लहसुन : Garlic

लहसुन (garlic) की एक गांठ को पीसकर पानी में मिलाकर गर्म करके उस पानी को छानकर गरारे )gargle) करने से टांसिल (tonsils) के बढ़ने की बीमारी में लाभ मिलता है।

  1. पपीता : Papaya

 –  टांसिल (tonsils) बढ़ने तथा गले में दर्द (sore throat) होने पर 1 गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच पपीते का दूध मिलाकर गरारे करने से तुरंत आराम (quick relief) हो जाता है।

 

 –  कच्चे पपीते (papaya) के हरे भाग को चीरकर उसका दूध निकालकर 1 चम्मच दूध (milk) को 1 गिलास गुनगुने पानी में डालकर गरारें (gargle) करें। इससे टॉसिल (tonsils) में लाभ मिलता है।

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  1. लौंग: Cloves

एक पान का पत्ता, 2 लौंग (cloves), आधा चम्मच मुलेठी, 4 दाने पिपरमेन्ट को एक गिलास पानी (Water) में मिलाकर काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से टांसिल (tonsils) बढ़ने में लाभ होगा।

 

  1. अजवाइन : Ajwain

1 चम्मच अजवाइन (ajwain) को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल (boil) लें। फिर इस पानी को ठंडा करके उससे कुल्ला और गरारे (gargle) करने से आराम आता है।

गर्म पानी में ग्लिसरीन (glycerin) मिलाकर कुल्ला करने से गले में काफी आराम (Relief) आता है।

 

  1. ग्लिसरीन : Glycerin

ग्लिसरीन को फुरेरी (cotton piece – रूई के फाये से) टांसिल पर लगाने से सूजन (swelling) कम हो जाती है।

 

  1. तुलसी : Tulsi

 –  तुलसी की माला गले में पहनने से टांसिल (tonsils) के रोग नहीं होते हैं।

 –  तुलसी की एक चुटकी मंजरी (बीज) को पीसकर शहद (honey) के साथ चाटने से टांसिल (tonsils) ठीक होकर गला खुल जाता है।

 –  तुलसी के 4-5 पत्तों को पानी में डालकर उबाल (boil) लें। इस पानी से गरारे करने से गले में आराम (relief) आता है।

 

  1. अनन्नास : Annanas

टांसिल (tonsils) के बढ़ जाने पर अनन्नास का जूस (juice) गर्म करके पीने से लाभ होता है।

 

  1. शहतूत : Shahtoot

1 चम्मच शहतूत के शर्बत को गर्म पानी (hot water) में डालकर गरारे करने चाहिए।

 

  1. दालचीनी : Daalchini- Cinnamon

 –  दालचीनी को पीसकर शहद (honey) में मिलाकर इसे उंगली से टांसिल (tonsils) पर लगाएं। इससे टांसिल के बढ़ने में लाभ (benefit) होता है।

 

 –  चुटकी भर दालचीनी (cinnamon) एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन 3 बार चूसने से टॉंसिल (tonsils) के रोग में सेवन करने से लाभ (benefit) होता है।

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  1. नीम : Neem

निर्गुण्डी की जड़ चबाने (chewing) से, नीम के काढ़े से कुल्ला करने से या थूहर का दूध टांसिल (tonsils) पर लगाने से टांसिल समाप्त (kills tonsils) हो जाते हैं।

 

  1. मालकांगनी : Maalkangani

मालकांगनी, हल्दी, पाढ़, रसौत, जवाखार और पीपल (peepal) को बराबर लेकर पीस लें फिर इसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां (small tablets) बनाकर रोजाना 2 गोली चूसने से टांसिल (tonsils) में आराम आता है।

 

  1. हल्दी : Haldi- Turmeric

2 चुटकी पिसी हुई हल्दी, आधी चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च (black pepper) , और 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर आग पर गर्म कर लें और फिर शहद (mix in honey) में मिलाकर रात को सोते समय पीने से 2 ही दिन में टांसिल (tonsils) की सूजन दूर हो जाती है।

 

  1. सिंघाड़ा : Singhada

गले में टांसिल (tonsils) होने पर सिंघाड़े को पानी में उबालकर (boil) उसके पानी से कुल्ला (gargle) करने से आराम आता है।

 

  1. दारूहल्दी : Daruhaldi

टॉसिल (tonsil) में दारूहल्दी, नीम की छाल, रसौत तथा इन्द्रजौ को बराबर मात्रा (equal quantity) में लेकर काढ़ा बनाकर सेवन करें तथा इस बात का ध्यान रखें कि काढ़ा चार चम्मच (four spoon) से ज्यादा न हो, क्योंकि ज्यादा काढ़ा गले में खुश्की (dry throat – गला सूख जाना) पैदा करता है।

 

  1. नमक : Namak -Salt

गर्म पानी (hot water) में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करने से गले की सूजन (relief from swelling) में काफी लाभ होता है।

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  1. कालीमिर्च : Kalaimirch- Black Pepper

कालीमिर्च, कूट, सेंधानमक (epsom salt), पीपल, पाढ़ और केवरी मोथा को बराबर मात्रा में लेकर पीस (mash it) लें और एक शीशी में भर लें। इसके बाद इसे शहद (mix in honey) में मिलाकर बाहरी गालों और कंठ पर लेप करें।

 

  1. तोरई : Torai

कड़वी तोरई को चिलम (hukah) में रखकर तम्बाकू की तरह उसका धुंआ गले में लेकर लार टपकाने से गले की (relief in swelling) सूजन दूर हो जाती है।

 

  1. फिटकरी : Fitkari

गले में दर्द होने पर गर्म पानी (Warm water) में फिटकरी और नमक डालकर गरारे करने से टांन्सिल (tonsil) ठीक होते हैं। इसके अलावा मुंह, गला और दांत (clean) साफ होते हैं।

 

  1. वत्सनाभ : Vatsbhaan

वत्सनाभ को पीसकर गले पर लेप (paste on throat) करने से टांसिल (tonsils) इत्यादि गले के रोगों में बहुत लाभ (benefit) मिलता है।

 

  1. पलास : Palaas

पलास की जड़ को घिसकर कान के नीचे (below ear) लेप करने से गलगंड मिटता है।

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