कब्ज का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज करे इन 40 नुस्खो से| kabaj ka Ayurvedic ilaj kare in 40 nuskho se

कब्ज का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज करे इन 40 नुस्खो से| kabaj ka Ayurvedic ilaj kare in 40 nuskho se

कब्ज का कारण हिंदी में : kabaj ke karan in hindi  

खानपान सम्बंधी गलत (wrong eating habits) आदतें जैसे- समय पर भोजन न करना, बासी और अधिक चिकनाई वाला भोजन, मैदा आदि से बनाया गया मांसाहारी भोजन (non veg food), भोजन में फाइबर की कमी, अधिक भारी भोजन अधिक खाना, शौच को रोकने की आदत, शारीरिक श्रम न करना (not doing physical work), विश्राम की कमी, मानसिक तनाव (टेंशन), आंतों का कमजोर होना, पानी की कमी, गंदगी में रहना, मादक द्रव्यों का सेवन , एलोपैथी दवाइयों (side effects of ellopathy medicines) के दुष्प्रभाव के कारण, भोजन के साथ अधिक पानी पीने, मिर्च-मसालेदार (spicy and oily food) तथा तले हुए पदार्थ जैसे-पूरी-कचौड़ी, नमकीन, चाट-पकौड़े खाने, अधिक गुस्सा, दु:ख आलस्य (laziness) आदि कारणों से कब्ज (kabaj) हो जाती है।      

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कब्ज का आयुर्वेदिक उपचार : kabaj ka ayurvedic ilaaj

 

  1. त्रिफला (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) :

 –  त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्के गर्म पानी (light warm water) के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज (finish the constipation) समाप्त होती है।

 –  त्रिफला का चूर्ण 6 ग्राम को शहद (honey) में मिलाकर रात में खा लें, फिर ऊपर से गर्म दूध (hot milk) पीने से कब्ज (kabaj) की शिकायत दूर होती है।

 –  त्रिफला 25 ग्राम, काली हरड़ 25 ग्राम, सनाय 25 ग्राम, गुलाब के फूल (rose flower) 25 ग्राम, बीज रहित मुनक्का 25 ग्राम, बादाम की गिरी (almond seed) 25 ग्राम, काला दाना 25 ग्राम और वनफ्शा 25 ग्राम को आदि लेकर अच्छी तरह पीस लें। इस मिश्रण को गर्म दूध (hot milk) के साथ पीने से कब्ज (kabaj) के रोग को समाप्त करता है।

 –  त्रिफला (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) तीनों को एक समान मात्रा में लेकर इसका चूर्ण (churan) तैयार कर लेते हैं। फिर रोजाना रात में सोते समय 2 चम्मच चूर्ण गर्म दूध (warm milk) या गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  1 चम्मच त्रिफला के चूर्ण को गर्म पानी (Warm water) के साथ सोने से पहले सेवन करने से कब्ज (kabaj) में आराम मिलता है।

 –  50 ग्राम त्रिफला, 50 ग्राम बादाम (almond) की गिरी, 50 ग्राम सौंफ, 10 ग्राम सोंठ और 30 ग्राम मिश्री आदि को अलग-अलग जगह कूट लें। इन सबको मिलाकर 6 ग्राम को खुराक के रूप में रात को सोने (drink before sleeping) पहले पी लें।

 –  त्रिफला गुग्गुल की 2-2 गोलिया (tablets) दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) गर्म पानी के साथ देने से पुरानी कब्ज़ (kabaj) मिट जाती है।

 –  त्रिफला के चूर्ण को कुछ घण्टे तक पानी (dip in water) में भिगोकर, छानकर उसका पानी पीने से भी (relief in gas problem) गैस की शिकायत नहीं रहती है।

 –  15 से 20 मुनक्का को 250 ग्राम दूध और 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल (noil) लें और जब केवल दूध (milk) बच जाये, तब इसे उतार दे। मुनक्के को खाकर ऊपर से दूध को पीने से कब्ज (kabaj) की शिकायत में लाभ होता है।

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मुनक्का :

 –  रोजाना प्रति 10 मुनक्का को गर्म दूध में उबालकर (boil milk) सेवन करने से लाभ (benefit) मिलता है।

 –  3 पीस मुनक्का, 20 ग्राम किशमिश और एक अंजीर को शाम (evening) के दौरान 250 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इन सभी को मसलकर उसमें थोड़ा पानी (rinse after adding water) मिलाकर छान लें। बाद में इसमें एक नींबू का रस (lemon juice) निचोंड़ दें और 2 चम्मच शहद को मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों कब्ज़ (kabaj) में लाभ मिलता है।

 –  मुनक्का का ताजा रस 28 मिलीलीटर से 56 मिलीलीटर को चीनी या सेंधानमक (sugar or epsom salt) मिलाकर पीने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  मुनक्का को रात को (before sleeping) सोने से पहले गर्म दूध (warm milk) के साथ पीने से लाभ होता है।

  1. आंवला :

 –  सूखे आंवले का चूर्ण रोजाना 1 चम्मच की मात्रा में खाना खाने (after eating meal) के बाद ने से लाभ होता हैं।

 –  1 चम्मच आंवले का चूर्ण शहद (with honey) के साथ रात में लें।

 –  आंवले के फल का चूर्ण यकृत बढ़ने, सिर दर्द, कब्ज (constipation), बवासीर व बदहजमी रोग में त्रिफला चूर्ण के रूप में प्रयोग (use) किया जाता है। 3 से 6 ग्राम की मात्रा में त्रिफला चूर्ण फंकी गर्म पानी (hot water) के साथ रात में सोते समय लेने से कब्ज (kabaj) मिटता है।

 –  रात को एक चम्मच पिसा हुआ आंवला पानी या दूध (water or milk) से लेने से सुबह दस्त साफ आता है, कब्ज नहीं रहती। इससे आंत तथा पेट साफ (cleans stomach) हो जाता है।

 –  आंवले का मुरब्बा (amle ka murabba) खाकर ऊपर से दूध पीने से कब्ज (kabaj) समाप्त हो जाती है।

 –  आंवला, हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण बनाकर गर्म पानी (hot water) के साथ लें।

 –  ताजे आंवले का रस (fresh amla juice) शहद के साथ लेने से पेट खाली होता है।

 –  आंवला की चटनी (chutney) खायें

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  1. नमक :

 –  रात को तांबे के बर्तन (copper crockery) में पानी भरकर रख दें। उसमें 1 चुटकी की मात्रा में नमक (salt) डालकर सुबह के समय सेवन करने से कब्ज (kabaj) की शिकायत दूर हो जाती है।

 –  50 ग्राम नमक या काला नमक (black salt), लाहौरी नमक 10 ग्राम, अजवायन 5 ग्राम, भुनी हींग 10 ग्राम, त्रिफला व सौंफ 50-50 ग्राम को पीसकर (mash) छान लें। इस चूर्ण को खाना खाने के बाद 5 ग्राम गर्म पानी (hot water) से लें। इससे कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  काला नमक, अजवाइन (ajwain), छोटी हर्र और सौंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर (mash) रख लें। रात को खाने से 1 घण्टे बाद 1 चम्मच गर्म पानी से फंकी लेने से कब्ज (kabaj) दूर होती है और आराम (rleief) मिलता है।

 –  1 से 2 ग्राम नमक (Salt) को गुनगुने पानी में रोज रात को पीने से कब्ज की शिकायत (problem of constipation) नहीं रहती हैं, क्योंकि इसको पीने से आंते साफ रहती हैं। शौच (stool passing easily) खुलकर आती है और पुरानी से पुरानी कब्ज (kabaj) चली जाती है।

 –  काला नमक (black salt) और छोटी हरड़ को पीसकर गर्म पानी के साथ खाना खाने के पहले (before eating food) 1 से 2 चम्मच की मात्रा में लेने से कब्ज (kabaj) की शिकायत दूर हो जाती है।

 –  नमक, 4 कालीमिर्च के पीस, 4 लौंग के पीस आधी कटोरी (half bowl) पानी में उबालकर पीने से कब्ज (kabaj) में राहत प्राप्त होती है।

  1. गिलोय :

 –  गिलोय का मिश्रण (mixture) या चूर्ण 1 चम्मच गुड़ के साथ खाने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ (jaggery) के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय (before sleeping) सेवन करने से कब्ज (kabaj) का रोग दूर हो जाता है।

  1. बथुआ :

 –  बथुआ की साग-सब्जी (sabji) बनाकर रोजाना खाते रहने से कब्ज (kabaj) की शिकायत कभी नहीं होती है। यह आमाशय (intestine) को ताकत देता है। इससे शरीर में ताकत व स्फूर्ति (energy) आती है।

 –  बथुआ को उबालकर (boil) इच्छानुसार चीनी मिलाकर एक गिलास सुबह-शाम पीने से कब्ज (kabaj) में आराम मिलता है।

 –  बथुआ आमाशय को ताकत देता है और कब्ज (relief from constipation) दूर करता है। यह पेट को साफ करता है। अत: कब्ज (kabaj) वालों को बथुए का साग रोज खाना (eat rgeularly) चाहिए। कुछ हफ्ते लगातार बथुआ (eating for few weeks) का साग खाते रहने से हमेशा होने वाला कब्ज (kabaj) दूर हो जाता है।

 –  बथुआ और चौलाई की भुजी (sabji) को मिलाकर सेवन करने से कब्ज (kabaj) नष्ट होती है।

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  1. चौलाई :

चौलाई की सब्जी खाने से कब्ज (kabaj) में लाभ मिलता है।

  1. मूंग :

 –  चावल (rice) और मूंग के दाल की खिचड़ी खाने से कब्ज़ (kabaj) में आराम होता है।

 –  चावल और मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज (relief in constipation) दूर होती है। 20 ग्राम मूंग की दाल और 10 ग्राम चावल की खिचड़ी (khichdi) बनाएं। फिर इसमें नमक मिलाकर और घी डालकर खाने से कब्ज दूर (kabaj) होकर दस्त साफ आता है।

  1. मसूर की दाल :

मसूर की दाल खाने से कब्ज (kabaj) में लाभ होता है।

  1. तरबूज :

तरबूज (watermelon) कुछ दिनों तक सेवन करने से पेट की कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

  1. तिल :

 –  60 ग्राम तिल को कूटकर रख लें, फिर इसमें समान मात्रा में गुड़ (jaggery) मिलाकर खाने से कब्ज (finishes the constipation) समाप्त होती है।

 –  लगभग 6 ग्राम तिल को पीसकर रख लें, फिर इसमें मीठा मिलाकर खाने से कब्ज (relief in constipation) मिटता है। तिल, चावल और मूंग की दाल की खिचड़ी भी कब्ज (kabaj) को दूर करती है।

 –  तिल का छिलका उतारकर, मक्खन और मिश्री (makkhan and mishri) को बराबर मात्रा में लेकर सुबह-सुबह खाने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  तिल, चावल और मूंग की दाल की खिचड़ी (khichdi) को खाने से पेट में गैस (gas) नहीं रहती है।

  1. सज्जीखार :

सज्जीखार 3 ग्राम, 3 ग्राम पुराना गुड़ (old jaggery) दोनों को मिलाकर रगड़कर छोटी गोलियां (tablets) बना लें। रोजाना सुबह 1 गोली खुराक के रूप में सेवन करने से कब्ज (kabaj) की बीमारी समाप्त हो जाती है।

  1. पीपल :

 –  पीपल (pipal) के 5-10 फल को रोजाना खाने से कब्ज (kabaj) का रोग मिट जाता है।

 –  पीपल के पत्ते (pipal leaves) और कोमल कोपलों का 40 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से विरेचन (पेट साफ करने वाला) लगता है।

 –  पीपल के पेड़ का फल (fruit) और नई कोपलें खाने से पेट मल का रुकना (relief in constipation) दूर हो जाता है।

  1. अंकोल :

अंकोल की जड़ (root) का चूर्ण खाने से पेट की कब्ज (kabaj) में आराम मिलता है।

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  1. ढाक :

ढाक के 20 पत्तों को ताजे पानी (fresh water) में पीसकर मरीज को दें, यदि दर्द हल्का (light pain) हो जाये तो एक बार फिर इसी मात्रा में देने से वायु (gas – गैस) के रोग में राहत देता है।

  1. नागदोन :

नागदोन और हरड़ का चूर्ण (churan) खाने से लाभ होता है।

  1. बड़ी पीलू :

बड़ी पीलू के पत्तों (leaves) का काढ़ा बनाकर पीने से पेट साफ (cleans stomach) हो जाता है।

  1. दही :

दही का तोड़ (tangy water -खट्टा पानी) पीने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

  1. दूध :

 –  250 मिलीलीटर गाय का दूध (cows milk), 250 ग्राम पानी और 5 काली मिर्च (black pepper) साबुत लेकर आग पर चढ़ा दें और जब पानी जल जाये, तब उतारकर छान (rinse) लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से वायुगोला का दर्द मिट (relief from pain) जाता है।

 –  गर्म दूध (Warm milk) के साथ ईसबगोल की भूसी या गुलकंद लेने से शौच (toilet) खुलकर आता है। बवासीर रोग (patient of piles) से ग्रस्त रोगियों को भी इसका सेवन करना चाहिए। गाय का ताजा दूध (fresh cows milk) तलुवों पर रगड़ने से बवासीर में राहत (relief) मिलती है।

 –  गर्म दूध (hot milk) के साथ 2 चम्मच गुलाब का गुलकंद या ईसबगोल (esabgol) की भूसी रात को लेने से शौच खुलकर आता है।

 –  कब्ज (constipation) होने पर दूध और घी का सेवन (eat) भी कर सकते हैं।

 –  दूध (milk) में घी या मुनक्का डालकर सेवन करने से कब्ज (kabaj) नहीं होता है।

 –  2 चम्मच गुलकंद को गर्म दूध (warm milk) में डालकर सोने से पहले पीने से सुबह शौच (cleans stomach) खुलकर आती है।

 –  250 मिलीलीटर दूध में 4 चम्मच ईसबगोल की भूसी (isabgl ki bhusi) डालकर पीने से मल ढीला होकर निकल जाता है।

 –  ईसबगोल 20 ग्राम को दूध (milk) के साथ रात में सोने से 30 मिनट पहले सेवन करने से कब्ज (kabaj) समाप्त हो जाती है।

 –  ईसबगोल के बीज (isabgol seeds) की भूसी 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें सुबह उठकर मिश्री में मिलाकर शर्बत (sharbat) बना लें। फिर इसे पीने से पेट की आंते फूल जाती हैं जिससे मल आसानी (easily passes the stool) से बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है। ध्यान रहे कि भूसी को बिना भिगोये सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी कष्ट को बढ़ा (increase the pain) देता है।

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  1. सत्यानाशी :

 –  सत्यानाशी की जड़ (root) की छाल 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 पीस लेकर पानी में पीस लेने से पेट के दर्द (relief in stomach pain) दूर हो जाता है।

 –  1 ग्राम से 3 ग्राम तक सत्यानाशी के तेल (oil) को पानी में डालकर पीने से पेट साफ (clean stomach) हो जाता है।

 –  सत्यानाशी की जड़ (root) की छाल 6 से 10 ग्राम तक पानी के साथ खाने से शौच (stool pass easily) साफ आती है।

 –  पीले धतूरे के बीजों (Seeds) से प्राप्त तेल की 30 बूंदों को दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

  1. चाकसू :

चाकसू के बीजों को पीसकर चूर्ण (churan) बनाकर खाने से पुरानी कब्ज (kabaj) मिट जाती है।

  1. मिट्टी :

 –  कपड़े (cloth) को पानी से गीला कर लें, उस पर गीली मिट्टी का लेप (paste) करके दोबारा इस पर फिर कपड़ा बांधें। रातभर इस तरह पेट (stomach) पर गीली मिट्टी की पट्टी को पेट पर रखने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है तथा पेट साफ (clean stomach) हो जाता है।

 –  पेट पर गीला कपड़ा (wet cloth) बिछायें। फिर उस पर गीली मिट्टी का लेप करके मिट्टी बिछाकर कपड़ा बांधे। रातभर (whole night) इस तरह पेट पर गीली मिट्टी रखने से कब्ज (kabaj) दूर होगी। मल बंधा हुआ तथा साफ आयेगा।

  1. मुलहठी :

 –  मुलहठी 5 ग्राम को गुनगुने गर्म दूध (warm milk) के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आती है।

 –  पिसी मुलहठी 125 ग्राम, पिसी सोंठ 3 चम्मच, पिसे (rose flower) गुलाब के सुखे फूल 2 चम्मच, 1 गिलास पानी में उबालकर (boil) ठण्डा होने पर छानकर सोते समय रोजाना पीने (drinking regularly) से पेट में जमा कब्ज (kabaj) और आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) निकल जायेगा।

  1. नीम :

 –  नीम के सूखे फल को रात में गर्म पानी (warm water) के साथ खाने से शौच खुलकर आती है।

 –  नीम के फूलों को सुखाकर (Dry) पीसकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना एक चुटकी रात को गर्म पानी (hot water) के साथ लेने से कब्ज (kabaj) में लाभ होता है।

 –  नीम की 20 पत्तियों (leaves) को पीसकर 1 गिलास पानी में मिला लें, सुबह-सुबह इससे एक कुल्ला (gargle) करके यह सारा पानी पीने से कब्ज (kabaj) नहीं रहती है।

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  1. ईसबगोल :

 –  ईसबगोल (isabgol) 2 चम्मच, हरड़ 2 चम्मच, बेलक का गूदा 3 चम्मच आदि को पीसकर चटनी (chutney) बना लें। सुबह-शाम (mroning and evening) इसमें से 1-1 चम्मच गर्म दूध के साथ सेवन करने से लाभ (beenfit) होता है।

 –  रात को सोने से पहले ईसबगोल की भूसी (isabgol ki bhusi) को दूध के साथ लेने से सुबह शौच खुलकर आती है।

 –  ईसबगोल 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर गुनगुने दूध (warm milk) के साथ सोने से पहले पी लें। कभी-कभी ईसबगोल की भूसी लेने से पेट फूल जाता है। ऐसा बड़ी आंतों (big intestine) में ईसबगोल पर बैक्टीरिया के प्रभाव से पैदा होने वाली गैस (gas) से होता है। इसलिए ध्यान रखें कि ईसबगोल की मात्रा less inquantity) कम से कम ही लें, क्योंकि ईसबगोल आंतों में पानी को सोखती (such the water) है, जिससे मल की मात्रा बढ़ती (increase stool) है और मल की मात्रा बढ़ने से आंतों की कार्यशीलता (increase activity) बढ़ जाती है, जिससे मल ठीक से बाहर निकल आता है। ईसबगोल (isabgol) लेने के बाद दो-तीन बार पानी पीना चाहिए। इससे ईसबगोल (isabgol) अच्छी तरह फूल जाता है। इसलिए ईसबगोल (isabgol) रात को ही लेना चाहिए और खाने के तुरंत (right after taking dinner) बाद लें।

 –  रानी आंव या आंतों की सूजन (swelling) में 100-100 ग्राम बेल का गूदा, सौंफ, ईसबगोल की भूसी और छोटी इलायची (small cardamom) को एक साथ पीसकर पाउडर (powder) बना लें। अब इसमें 300 ग्राम देशी खांड या बूरा मिलाकर कांच की शीशी (glass bottle) में भरकर रख दें। इस चूर्ण की 2 चम्मच मात्रा सुबह नाश्ता (breakfast) करने के पहले ताजे पानी के साथ लें और 2 चम्मच शाम को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी (Warm water) या गर्म दूध के साथ 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ (benefit) मिल जाता है। लगभग 45 दिनों तक यह प्रयोग करने के बाद बंद (stop after 45 days) कर देते हैं। इससे कब्ज (kabaj), पुरानी आंव या आंतों की सूजन के रोग (relief) दूर हो जाते हैं।

 –  कब्ज (constipation) होने पर ईसबगोल को जल में घोलकर (mix) उसका लुबाव बनाकर उसमें बादाम का तेल (almond oil) मिलाकर पीने से बहुत लाभ मिलता है। कब्ज (kabaj) दूर होने से पेट का दर्द (Stomach pain) भी नष्ट हो जाता है।

 –  ईसबगोल (isabgol) भूसी के रूप में काम में आता है। यह कब्ज (constipation) को दूर करता है। ईसबगोल के रेशे आंतों में पचते (not digesting) नहीं हैं तथा तरल पदार्थ सूखकर फूल जाते हैं और मल की निकासी (quick release) शीघ्र करते हैं। इसका लुबाव आंतड़ियों को शीघ्र चलने में सहायता (help) करता है जिससे मलत्याग में सहायता (help) मिलती है। तीन चम्मच ईसबगोल गर्म पानी या गर्म दूध (hot milk) से रात को सेवन करने से कब्ज (kabaj) में लाभ मिलता है।

 –  ईसबगोल (isabgol) के बीज की भूसी 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो (dip in water) दें सुबह उठकर मिश्री में मिलाकर शर्बत (sharbat) बना लें। इसे पीने से पेट (stomach) की आंते फूल जाती हैं जिससे मल आसानी से बिना किसी रुकावट (without any hurdle) के बाहर निकल जाता है। ध्यान रहें कि भूसी को बिना भिगोये सेवन (never eat without dip) नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी कष्ट को (can increase problem) बढ़ा देता है।

 –  गर्मी के दिनों (summer days) में सुबह-शाम 3-3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को मिश्री (mixed with mishri water) के मिले हुए जल में कुछ दिनों तक भिगोकर (dip) सेवन करने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाता है।

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  1. अदरक :

 –  अदरक का रस (ginger juice) 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद (honey) में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है।

 –  1 कप पानी में 1 चम्मच भर अदरक (ginger) को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल (boil) लें। फिर इसे छानकर पीने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  अदरक, फूला हुआ चना और सेंधानमक (epsom salt) मिलाकर सेवन करने से लाभ (benefit) होता है।

  1. गुलकंद :

 –  गुलकंद 30 ग्राम को दूध (milk) के साथ रोजाना पीने से कब्ज (kabaj) समाप्त होती है। गुलकंद को खाकर ऊपर से दूध (drink milk) पी जायें। ऐसा 7 दिनों तक करने से कब्ज की शिकायत (problem of constipation) दूर हो जाती है।

 –  गुलकंद (gulkand – गुलाब की पंखड़ियों से प्राप्त रस) 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम (morning and evening) सेवन करने से शौच साफ आती है। भूख बढ़ती है और शरीर में ताकत (strength in body) आती है।

 –  2 चम्मच गुलकंद को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध (light warm milk) के साथ सोने से पहले लेने से पेट की गैस में (benefit for stomach gas) लाभ होता है।

 –  गुलकंद 2 बड़ा चम्मच, मुनक्का 4 पीस, सौंफ आधा चम्मच (spoon) को मिलाकर एक कप पानी में उबालकर (noil) सेवन करें।

 –  गुलाब (rose) की सूखी कली 20 ग्राम और ताल मिश्री 40 ग्राम को मिलाकर 250 मिलीलीटर गर्म दूध (warm milk) के साथ पीने से लाभ होता है।

 –  गुलकंद, आंवला (amla), हरड़ का मुरब्बा, बहेड़ा का मुरब्बा आदि में से बीजों (Seed) को बाहर निकालकर पीसकर छोटी-छोटी गोलियां (small tablets) बना लें। रोजाना 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) 1-1 गोली गर्म दूध (warm milk) या पानी के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज (kabaj) मिटती है।

  1. नींबू :

 –  नींबू का रस, 5 मिलीलीटर अदरक का रस (ginger juice) और 10 ग्राम शहद मिलाकर गर्म पानी (Warm water) के साथ सेवन करने से कब्ज (kabaj) नष्ट होती है।

 –  5 मिलीलीटर नींबू के रस (lemon juice) को 10 ग्राम मिश्री में घोलकर पानी के साथ पीने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  नींबू के रस (lemon juice) को पीने से वायु (गैस) का गोला समाप्त हो जाता है।

 –  गन्ने का रस (sugarcane juice) गर्म करके और नींबू का रस थोड़ी-सी मात्रा में लेकर सुबह के समय एक साथ लेने से (benefit in morning) लाभ होता है।

 –  1 नींबू का रस गर्म पानी (warm water) के साथ रात को सोने से पहले पी लें। इससे सुबह शौच (washroom) खुलकर आती है।

 –  नींबू का रस 2 चम्मच और चीनी (sugar) 5 ग्राम को मिलाकर शर्बत बना लें। 4-5 दिन तक लगातार पीने से कब्ज में लाभ (relief in constipation) होता है।

 –  नींबू के रस (lemon juice) में थोड़ी-सी पिसी हुई काली मिर्च को डालकर सेवन करने से कब्ज (kabaj) नष्ट हो जाती है।

 –  नींबू के 10 मिलीलीटर रस को 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर (mix in water) सुबह के समय सेवन करने से कब्ज (kabaj) तुरंत समाप्त होती है।

 –  1 नींबू का रस 1 गिलास गर्म पानी (warm water) के साथ रात में सोते समय लेने से पेट साफ (cleans stomach) हो जाता है। नींबू का रस 15 मिलीलीटर और शक्कर (sugar – चीनी) 15 ग्राम लेकर 1 गिलास पानी में मिलाकर रात को पीने से पुराना कब्ज (kabaj) कम हो जाता है।

 –  नींबू के रस में सेंधानमक (epsom salt) मिलाकर सेवन करने से पेट की बीमारी (Stomach diseases) और गैस बाहर निकल जाती है।

 –  1 गिलास गुनगुने पानी में 1 नींबू का रस (lemon juice) व एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से कब्ज (kabaj) दूर होती है और शरीर का वजन घटने (reduce weight) लगता है।

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  1. पानी :

 –  10 मिलीलीटर पानी को गर्म करके उसमें शहद (mix in honey) मिलाकर रात को सोने से 30-40 मिनट पहले पीने से कब्ज (kabaj) की शिकायत दूर होती है।

 –  कब्ज से पीड़ित व्यक्ति (affected person) को दिन में 25-30 गिलास पानी पीना चाहिए।

 –  एक गिलास गर्म पानी (warm water) में 1 चम्मच नमक मिलाकर पीने से उल्टी (vomiting) आकर मेदा अर्थात आमाशय साफ हो जाता है जिससे कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  पानी को पीने (drinking water) से पेट में कब्ज (kabaj) नहीं बनती है, क्योंकि पानी पीने से मल ढीला (loss the stool) रहता है और आसानी से शौच आ जाता है। यदि कब्ज (kabaj) की शिकायत हो तो सुबह पानी में नींबू को निचोड़कर पीने से (relief in constipation) कब्ज ठीक हो जाती है।

 –  सुबह सोकर (wake up in the morning) उठते ही 1 गिलास पानी पीने तथा भोजन करते समय घूंट-घूंट (sip by sip) करके पानी पीने से कब्ज (kabaj) के रोग में लाभ मिलता है।

ध्यान देने योग्य बातें – take care of these things: सर्दी के दिनों में रोजाना डेढ़ से 2 लीटर और गर्मी में लगभग 3 लीटर पानी अवश्य (must drink) पीना चाहिए। भोजन के 1 घंटे पहले और लगभग 2 घंटे बाद ही पानी पीना (drinking water) चाहिए।

  1. काबुली हरड़ :

काबुली हरड़ को रात में पानी (dip in water) में डालकर भिगो दें। सुबह इसी हरड़ को पानी में रगड़कर नमक (salt) मिलाकर 1 महीने तक लगातार पीने (drink) से पुरानी से पुरानी कब्ज (kabaj) मिट जाती है।

  1. एरण्ड :

 –  एरण्ड का तेल 30 मिलीलीटर को गर्म दूध (hot milk) में मिश्री के साथ पीने से कब्ज (kabaj) में लाभ होता है।

 –  1 कप दूध में 2 चम्मच एरण्ड के तेल (caster oil) को मिलाकर सोते समय पिलाने से पेट की कब्ज (kabaj) नष्ट हो जाती है।

 –  सोते समय 2 चम्मच एरण्ड का तेल (caster oil) पीने से कब्ज दूर होती है, दस्त साफ आता है। इसे गर्म दूध या गर्म पानी (hot water) में मिलाकर पी सकते हैं।

 –  एरण्ड के तेल (caster oil) की 10 बूंदों को रात को सोते समय पानी में मिलाकर (mix in water) सेवन करने से कब्ज (kabaj) की बीमारी में लाभ (benefit) होता है।

 –  एरण्डी के तेल (caster oil) की 2 से 4 बूंदों को माता के दूध में मिलाकर (mix in milk) देना चाहिए।

 –  अरण्डी के तेल की पेट पर मालिश (stomach massage) करने से पेट साफ हो जाता है।

 –  6 मिलीलीटर अरण्डी के तेल (caster oil) में 6 ग्राम दही मिलाकर आधे-आधे घण्टे के अन्तर (gap of 30 minutes) के बाद पिलाने से वायु गोला हमेशा के लिए समाप्त (finishes) हो जाता है।

 –  एरण्डी का तेल (caster oil) 20 मिलीलीटर और अदरक का रस 20 मिलीलीटर मिलाकर पी लें, फिर ऊपर से थोड़ा-सा गर्म पानी (warm water) पीने से वायु गोला में तुरंत लाभ होता है।

 –  एरण्ड का तेल (caster oil) और उसकी 2 से 3 कलियां खाने से पेट साफ (cleans stomach) हो जाता है।

 –  एरण्ड के पत्ते (Caster leaves) और हरड़ की छाल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से बंद पेट खुल (opens stomach) जाता है और शौच खुलकर आ जाती है।

 –  एरण्डी का तेल (caster oil) 3 चम्मच, बादाम रोगन 1 चम्मच को 250 मिलीलीटर दूध में गर्म (hot milk) कर सोने से पहले लेने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  1 चम्मच एरण्ड का तेल (caster oil) दूध में मिलाकर सोने से पहले (before sleeping) पीने से लाभ होता है।

 –  एरण्ड के तेल (caster oil) की 30 बूंदों को 250 मिलीलीटर दूध में मिलाकर सेवन करने से सामान्य पेट की गैस दूर (relief from gas) हो जाती है। नवजात शिशुओं (young toddlers) को छोटी चम्मच में दी जा सकती है।

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  1. बड़ी हरड़ :

 –  बड़ी हरड़ को पीसकर (mash) रख लें। फिर 5 ग्राम चूर्ण को हल्के गर्म पानी (light warm water) के साथ सेवन करने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  बड़ी पीली हरड़ का छिलका (peal) 6 ग्राम कालानमक या लाहौरी आधा ग्राम मिलाकर कूटकर (mash) रख लें। इसे सोने से पहले पानी (before sleeping) के साथ लेने से पेट साफ होता है।

  1. हरड़ :

 –  हरड़ चूर्ण (harad churan) गुड़ में मिलाकर सेवन करने से वात-रक्त (खूनी वात) के कारण होने वाला पेट का दर्द (relief from stomach pain) दूर होता है।

 –  छोटी हरड़ (harad) 1-1 की मात्रा में दिन में 3 बार चूसने से गैस की बीमारी (relief from gas problem) खत्म हो जाती है।

 –  हरड़, बहेड़े और आंवले (amla) को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण (churan) बनाकर रख लें। इस चूर्ण को त्रिफला चूर्ण (triphla churan) कहते हैं। रात्रि को 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गर्म जल या दूध (water or milk) के साथ सेवन करने से kabaj नष्ट होती है।

 –  हरड़ (harad) सुबह-शाम 3 ग्राम गर्म पानी (hot water) के साथ खाने से कब्ज (kabaj) में फायदा मिलता है। इससे बवासीर (relief in piles) रोग में भी लाभ होता है।

 –  हरड़, सनाय और गुलाब के गुलकंद की गोलियां (tablets) बनाकर खाने से मल बंद (कब्ज) को खुलकर लाता है।

 –  10 ग्राम हरड़, 20 ग्राम बहेड़ा और 40 भाग आंवला (amla) आदि को मिलाकर चूर्ण बना लें। रात को सोते 1 चम्मच चूर्ण दूध या पानी (milk or water) के साथ लेने से लाभ होता है।

 –  हरड़ (harad) की छाल 10 ग्राम, बहेड़ा 20 ग्राम, आंवला (amla) 30 ग्राम, सोनामक्खी 10 ग्राम, मजीठ 10 ग्राम और मिश्री 80 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण (churan) बनाकर रख लें। फिर 10 ग्राम मिश्रण (mixture) को शाम को सोने (before sleeping) से पहले सेवन करने से कब्ज (kabaj) में लाभ होता है।

 –  छोटी हरड़ और 1 ग्राम दालचीनी (cinnamon) मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें, इसमें 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी (light warm water) के साथ रात में सोने से पहले लेने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  छोटी हरड़ 2 से 3 रोजाना चूसने से कब्ज (relief in constipation) मिटती है।

 –  छोटी हरड़ को घी (roast in ghee) में भून लें। फिर पीसकर चूर्ण (churan) बना लें। 2 हरड़ों का चूर्ण रात को सोते (eat before sleeping) समय पानी के सेवन करने से शौच खुलकर आती है।

 –  छोटी हरड़, सौंफ (saunf) और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें से 1 चम्मच चूर्ण रात को सोते समय (before sleeping) पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

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  1. छाछ :

 –  छाछ में पिसी हुई अजवाइन (ajwain) को पीने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  छाछ (chhach) पीने से कब्ज, दस्त, पेचिश, खुजली, चौथे दिन आने वाला मलेरिया बुखार, तिल्ली, जलोदर, रक्तचाप (blood pressure) की कमी या अधिकता, दमा, गठिया, अर्धांगवात, गर्भाशय के रोग, मलेरियाजनित यकृत के रोग और मूत्राशय की पथरी (stone problem) में लाभ होता है।

 –  छाछ में अजवायन और नमक (ajwain and milk) मिलाकर पीने से मलावरोध मिट जाता है।

  1. काला नमक :

6 ग्राम काला नमक (black salt) को देशी घी में भूनकर गर्म पानी के साथ खाने से 3-4 बार stool आने से पेट हल्का हो जाता है।

  1. गुलाब :

 –  गुलाब के फूल (rose flower) 10 ग्राम, सनाय 10 ग्राम, सौंफ (saunf) 10 ग्राम और मुनक्का 20 ग्राम को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर रख लें। सुबह (morning) उठकर सबको उसी पानी में उबालकर (boil) काढ़ा बना लें। जब पानी 50 मिलीलीटर शेष रह जाये, तब इस काढ़े को छानकर (rinse) पीने से कब्ज (kabaj) पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।

 –  गुलाब के फूल (rose flower) में बहुत सारे रेशे होते हैं अत: यह कब्ज दूर (releif from constipation) करता है। यह आंतों में छिपे हुए मल को बाहर (take out) निकाल देता है। 2-2 चम्मच गुलकंद सुबह-शाम को सोते समय गुनगुने दूध (warm milk or water) या पानी से लेने से कब्ज का नाश हो जाता है। इससे पेट व आंतों की गर्मी शांत होती है। यह दिमाग को ठंडक (cool brain) प्रदान करती है।

 –  2-2 चम्मच गुलकंद (gulkand) सुबह या सोते समय गुनगुने दूध अथवा पानी से लेने से कब्ज (kabaj) पूरी तरह से खत्म (finish) हो जाती है।

 –  गुलकंद को बराबर मात्रा (equal quantity) में अमलतास के गूदे के साथ 1-1 चम्मच या गुलकंद को सनाय की पत्ती (leaves) के साथ सेवन करने से कब्ज (kabaj) का रोग ठीक हो जाता है।

 –  गुलाब की पत्ती (rose leaves), सनाय तथा तीनों हर्रों को 3 : 2 : 1 के अनुपात में 50 ग्राम लेकर उबाल (boil) लें। उबलने पर चौथाई हिस्सा पानी (one fourth water) बाकी रहने पर रात में गुनगुना करके पी (drink) जाना चाहिए। कब्ज को दूर करने के लिए यह बहुत ही (useful herb) उपयोगी औषधि है।

 –  पुराने कब्ज (old constipation) में 2 बड़े चम्मच गुलकंद, 4 मुनक्का व आधा चम्मच सौंफ (saunf) को साथ-साथ उबालना चाहिए। जब आधा पानी (half water left) बच जाये तो रात में सोते समय, सर्दी में गर्म तथा गर्मी में ठण्डा पी (drink) जाए। करीब 2 गिलास पानी उबालने (boil) के लिए रखना चाहिए ताकि 1 गिलास बचे।

 –  गुलाब की पत्तियां (rose leaves) 10 ग्राम, सनाय का 1 चम्मच पिसा हुआ चूर्ण के रूप में, 2 छोटी हरड़ लेकर 2 कप पानी में तीनों को उबाल (boil) लें। पानी जब एक कप (cup) बच जायें, तब इस बने काढ़े का प्रयोग करने से कब्ज (kabaj) की बीमारी में लाभ (benefit) होता है।

 –  गुलाब (rose) 10 ग्राम, मजीठ 10 ग्राम, निसोत की छाल 10 ग्राम, हरड़ 10 ग्राम और सोनामाखी 10 ग्राम आदि को 80 ग्राम चीनी (sugar) में मिलाकर चूर्ण बना लें। लगभग 4 ग्राम चूर्ण को ठण्डे पानी (cold water) के साथ पीने से लाभ होता है।

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  1. पपीता :

 –  कच्चा पपीता (papaya) या पका पपीता खाने से कब्ज (kabaj) की शिकायत मिट जाती है।

 –  सुबह के समय पपीते का दूध (papaya milk) पीने से कब्ज दूर होती है।

 –  कब्ज (constipation) में पका हुआ पपीता सोने से पहले खाने (benefit) से लाभ होता है।

 –  खाना खाने के बाद पपीता (papaya) खाने से कब्ज (kabaj) की शिकायत दूर हो जाती है।

  1. प्याज :

 –  1 कच्चा प्याज (onion) रोजाना खाने के साथ खाने से कब्ज (relief in constipation) दूर होती है।

 –  प्याज (onion juice) के काढ़े को 40 मिलीलीटर दिन में 2-3 बार सेवन करने से लाभ (benefit) होता है।

 –  कच्चा प्याज (onion) रोजाना भोजन के साथ खाने से कब्ज (kabaj) का रोग ठीक होता है।

  1. मूली :

 –  मूली पर नमक (salt), कालीमिर्च डालकर खाना खाते समय रोजाना 2 महीने तक खाने से कब्ज (relief from constipation) दूर हो जाती है।

 –  मूली के पत्तों (mooli leaf juice) का रस 20 से 40 मिलीलीटर तक खुराक के रूप में सुबह-शाम (morning ad evening) सेवन करने से दस्त और पेशाब (urine) खुलकर आता है।

 –  मूली के बीजों (seeds) का चूर्ण 1-3 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम (morning and evening) सेवन करने से कब्ज (kabaj) में लाभ होता है।

 –  मूली व उसके पत्तों को काटकर, उसमें प्याज (onion), खीरा या ककड़ी, टमाटर आदि को काटकर (cut and mix) मिला लें। इस प्रकार तैयार हुए सलाद (salad) में 5-10 बूंद सरसों का तेल भी मिला सकते हैं। भोजन के साथ रोजाना इस प्रकार तैयार किया हुआ सलाद (salad) जो पूरे भोजन का एक तिहाई है खाने से कब्ज़ (kabaj) दूर होता है।

 –  मूली का साग (mooli ka saag) या ताजी मुलायम मूलियां पत्तों सहित खाने या मूली का अचार (mooli ka achaar) खाने से कब्ज़ (kabaj) मिटता है।

  1. काला दाना :

 –  काला दाना 9 ग्राम को देशी घी (desi ghee) में भूनकर चूर्ण बना लें। इसमें लगभग आधा ग्राम सोंठ को खाने से लगातार 5 से 6 दिनों तक दस्त (loose motion) आकर कब्ज (kabaj) की शिकायत मिट जाती है।

 –  कालादाना 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट की गैस (releif from stomach gas) निकल जाती है और पेट हल्का हो जाता है।

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  1. मेथी :

 –  मेथी के पत्तों (methi leaves) की सब्जी खाने से कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  2 चम्मच (spoon) दाना मेथी को खाना खाने के बाद फंकी के द्वारा लेने से पेट का दर्द (stomach pain) ठीक हो जाता है और भूख लगने लगती है।

 –  भोजन में मेथी की सब्जी (methi ki sabji) सुबह-शाम खाने से कब्ज (kabaj) समाप्त हो जाती है।

 –  सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी (water) के साथ पीने से कब्ज (kabaj) दूर होगी।

 –  पेट में जब कब्ज (constipation) हो जाए तो मेथी के पत्तों की सब्जी खाना लाभप्रद (helpful) होगा।

 –  1-1 चम्मच मोटा (दरदरी) दानामेथी, ईसबगोल (isabgol) और चीनी मिलाकर रात को गर्म दूध (warm milk) से फंकी लेने से कब्ज (kabaj) दूर हो जाती है।

 –  मेथी की नरम पत्तियों (soft leaves) का साग बनाकर खाने से कब्ज में राहत मिलती है, रक्त शुद्ध (purifies the blood) होता है, शक्ति बढ़ती है और बवासीर रोग में लाभ (rleief in piles) मिलता है।

 –  मेथी के 3-3 ग्राम की मात्रा में पीसे हुए चूर्ण (churan) को सुबह-शाम गुड़ या पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज मिटता है (relief in constipation) और लीवर (यकृत) को मजबूत बनता है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति यदि मेथी दानों का साग खाएं तो दस्त (cleans the loose motion) साफ आता है।

 –  100 ग्राम दाना मेथी दरदरी (मोटी) कूटकर 50 ग्राम भूनी (roasted) हुई छोटी हरड़ पीसकर मिला लें। एक चम्मच सुबह तथा एक चम्मच शाम (morning and evening) को पानी के साथ सेवन करने से कब्ज और पेट दर्द (pain in stomach) में लाभ होगा।

 –  यदि आंतों की कमजोरी से कब्ज (constipation) हो तो सुबह-शाम 1-1 चम्मच मेथी दाने का चूर्ण पानी के साथ (with water) कुछ दिनों तक लेने से आंतों तथा यकृत को ताकत (power) मिलती है और कब्ज (kabaj) दूर होती है।

 –  आंतों की कमजोरी (weakness in intestine) से पेट में कब्ज बनती है, इसलिए आंतों को मजबूत (strong) बनाने और रोगमुक्त करने के लिए 1-1 चम्मच मेथी पाउडर (methi powder) पानी के साथ कुछ दिनों तक लगातार सेवन करें। इससे कब्ज (kabaj) में राहत मिलती है।

 –  कब्ज, पेट में अल्सर (stomach ulcer) हो तो एक कप मेथी के पत्तों को उबालकर, शहद में घोलकर (mix in honey) सुबह-शाम पीना चाहिए।

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कब्ज (kabaj) के अन्य उपचार :

 –  कब्ज़ (constipation) से पीड़ित रोगी को किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक (specialist) की देख-रेख में ही कार्य क्षमता के अनुसार ही दो से तीन तक उपवास (fast) रखना चाहिए और ध्यान रखे की इलाज के दौरान केवल छाछ (lassi) का ही सेवन करें।

 –  उपवास के बाद केला (banana), पपीता, शरीफा और चीकू जैसे- नरम फल (soft fruits) ही खाएं।

 –  मरीज (patient) को खाने में सुबह और शाम दही-चावल और पके हुए केला (banana) ही देने चाहिए।

 –  शिशु को माता (mother) द्वारा फल-सब्जि़यों आदि का रस पिलाने से ही कब्ज (kabaj) आसानी से समाप्त हो जाती है। गुलकंद (gulkand) खिलाने से भी इससे निजात पाई जा सकती है।

 –  गुनगुने पानी (Warm water) में शहद की कुछ बूंदे मिलाकर पिलाने से शिशु को कब्ज (gas – गैस) से छुटकारा मिलता है।

 –  माता का दूध (mothers milk) पीने से भी शिशु कब्ज की पकड़ में नहीं आते हैं। हींग को पानी (water) में घिसकर नाभि के आस-पास (nearby) के भाग पर लेप करने से शिशुओं की कब्ज (kabaj) ठीक हो जाती है।

 –  सावां (सामा, एक प्रकार का अनाज) है जिसे उबाल (boil) या भूनकर (roast) खाया जा सकता है। इससे कब्ज (constipation)  दूर हो जाती है।

 –  गर्भवती स्त्री (pregnant woman) के कब्ज में और बच्चों की कब्ज में पोय (पोरो, पोई) साग, आहार में लेने से लाभ (benefit) होता है।

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