Know the Reason of Cervical Cancer – जानिये क्या कारण है सरवाइकल कैंसर बढ़ने का

Know the Reason of Cervical Cancer – जानिये क्या कारण है सरवाइकल कैंसर बढ़ने का

सरवाइकल कैंसर Cervical Cancer – सर्विक्स (uterus mouth- यूटरस माउथ) का कैंसर है। आमतौर पर फिजिकल रिलेशनशिप (physical relationship) के दौरान लापरवाही बरतना इसकी सबसे बड़ी वजह (big reason) होती है। इस कैंसर के बारे में अक्सर आखिरी चरण (last level) में ही पता चलता है।

पूरी दुनिया (world) में प्रति वर्ष 2,70,000 महिलाएं सरवाइकल कैंसर (गर्भाशय के मुख का कैंसर) की शिकार (victim) होती हैं। इसमें 88 फीसदी मौतें विकासशील देशों (developing countries) में होती है। भारत में जागरूकता की कमी (lack of awareness), स्क्रीनिंग व इलाज की कमी की वजह से यह बीमारी जानलेवा (dangerous disease) बनती जा रही है। इसके इलाज (एचपीवी वैक्सीन) के बारे में भी महिलाओं को अधिक जानकारी (no information) नहीं होती।

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सरवाइकल कैंसर कैसे बढ़ता है– How Cervical Cancer Grows

एचपीवी वायरस – HPV Virus

सरवाइकल कैंसर (cervical cancer) उन महिलाओं में ज्यादा देखा गया है, जो कम उम्र से यौन संबंध (physical relation) बनाना शुरू कर देती हैं, एक से अधिक साथियों के साथ असुरक्षित सेक्स (unsafe sex) करती हैं और सेक्स के प्रति बहुत अधिक सक्रिय (more active towards sex) होती हैं। सरवाइकल कैंसर हुमन पेपिलोमा वायरस (virus) की वजह से होता है। एचपीवी वायरस पुरुषों के वीर्य (sperm) में होता है। सेक्स के दौरान एचपीवी वायरस पुरूषों से महिलाओं (from mens to womens) की योनि में पहुंच जाता है। सामान्य सेक्स संबंध (normal sex relation) में एचपीवी वायरस अधिक सक्रिय नहीं होता। लेकिन जो महिलाएं बहुत अधिक सेक्स संबंध (extra sex relations) बनाती है, उनमें एचपीवी का प्रसार हो जाता है और यही सरवाइकल कैंसर (reason of cervical cancer) का कारण बन जाता है।

उम्र का खास रोल – Roll of Age

अक्सर सर्वाइकल सेल्स में असामान्य बदलाव (abnormal changes) से बीमारी के लक्षण साफ नहीं दिखते। लेकिन सेल्स में बदलाव (changes in cells) अगर कैंसर का रूप ले ले, तब इसके लक्षण साफ (clear symptoms) हो जाते हैं। वैसे, सरवाइकल कैंसर में उम्र की खास (important role of age) भूमिका होती है। इसके ज्यादातर केसेज 40 से ऊपर की महिलाओं (ladies) में देखे जाते हैं, जबकि 15 से कम उम्र की किशोरियों (young girls) में इसके कम केसेज पाए जाते हैं। ऐज बढ़ने के साथ यह प्रॉब्लम ज्यादा सीरियस (serious problem) हो जाती है। इसकी वजह यह है कि पीरियड (periods) के रुकने के बाद महिलाएं मान लेती हैं कि उन्हें अब पैप स्मियर टेस्ट (no need of test) की जरूरत नहीं रही।

लाइफस्टाइल ऐडजस्टमेंट्स- Lifestyle Adjustment

मेडिकल केयर (medical care) के साथ कुछ लाइफ स्टाइल ऐडजस्टमेंट्स (adjustment) करके सर्वाकल कैंसर से बचा जा सकता है। अगर आपको स्मोकिंग की हैबिट (habit of smoking) है, तो इसे छोड़ दें। स्टडीज (studies) बताती हैं कि एचपीवी के चलते होनेवाले सर्विक्स डैमेज के प्रॉसेस (process) को स्मोकिंग से स्पीड (speed) मिल सकती है।

सरवाइकल कैंसर के कारण– Reasons of Cervical Cancer

  • एक से अधिक पुरुष (MoRe then 1 man) के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाली महिलाओं में सरवाइकल कैंसर का खतरा (more risk of cervical cancer) ज्यादा रहता है। इसीलिए इस संक्रमण (infection) को एसटीडी यानी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज भी कहते है।
  • कई बार ये बीमारी जेनेटिक कारणों (genetic reasons) से भी होती है।
  • गर्भनिरोधक गोलियों के अधिक इस्तेमाल (more usage of pills) से यह बीमारी हो सकती है।
  • एल्कोहल और सिगरेट (alcohol and cigarette) का सेवन भी इसका कारण हो सकता है।
  • गांवों (village) में अधिक प्रसव और बार-बार गर्भधारण के कारण एचपीवी संक्रमण (hpv infection) होता है।
  • जबकि शहरों में बीमारी की जानकारी (information of disease) होने पर भी जागरूकता की कमी इसका कारण बनती है।

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लक्षण– Symptoms

  • वैजाइना से ब्लड डिस्चार्ज (blood discharge) होना।
  • पीरियड्स में इरेग्युलर चेंज (irregular change) आना।
  • सेक्सुअल इंटकोर्स (sexual intercourse) के दौरान दर्द होना।
  • पेल्विक मशल्स (pelvic muscles) में दर्द होना।

इन बातों का ध्यान रखें

  • पर्सनल हाईजीन (personal hygiene)का खास ख्याल रखें।
  • ऐसे पार्टनर से रिलेशन (relation) न बनाएं, जिसके कई लोगों (few peoples) से रिलेशन रहे हों।
  • सेक्सुअल इंटरकोर्स (sexual intercourse) के दौरान कंडोम का इस्तमाल करें। इससे एचपीवी इंफेक्शन का रिस्क (infection risk) 70 प्रतिशत कम हो जाता है।
  • पैप स्मियर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट (hpv test) और कोल्पोस्कोपी टेस्ट कराते रहें।
  • बार-बार प्रेग्नेंसी (pregnancy) से बचें।
  • पांच साल या इससे अधिक समय तक गर्भ निरोधक (pregnancy pills) गोलियां न लें।

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