Did You Know About These 6 Winter Disease- जानिये सर्दी की इन 6 बीमारियों के बारे मे

Did You Know About These 6 Winter Disease- जानिये सर्दी की इन 6  बीमारियों के बारे मे

सर्दियों का मौसम (winter season) आपको कई बीमारियों के करीब पहुंचा सकता है। अनेक बीमारियां (lots of diseases) इस मौसम में हमारे आसपास (nearby) मंडराती रहती हैं। इनसे आप खुद को कैसे बचाए (how to save) रख सकते हैं? सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि समस्याएं (problems) सर्दियों के मौसम में आम होती हैं। जो लोग समय पर इन बातों का ध्यान (take care these days) रखते हैं और मौसम के अनुरूप अपना खयाल रखते हैं, उन्हें तो सर्दी की ये बीमारियां छू (cant even touch you) भी नहीं पातीं, लेकिन जो लोग बदलते मौसम (changing atmosphere) में शरीर की जरूरतों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते, उन्हें कई बीमारियां अपनी चपेट (caught in this act) में लेने को आतुर रहती हैं। ऐसे में क्यों न सावधानी बरतकर (take care) स्वस्थ रहा जाए।

यह भी पढ़ें :- कुछ ऐसे प्रोडक्टिव काम जो आप टॉयलेट में सीट पर भी बैठ कर भी कर सकते है

सर्दीजुकाम– Cough and Cold

इसे कॉमन कोल्ड (common cold) भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन (change in temperature) के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर (weak immune system) होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। संक्रमण वाली इस बीमारी के वारयस से बचने के लिए साफ-सफाई (special care of cleaning) का खास ध्यान रखना होता है। बार-बार हाथ को साबुन (hand wash) से धोते रहना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचे रह सकें। यह वायरल इंफेक्शन (viral infection) है, इस कारण इसमें एंटीबायटिक (antibiotic) की जरूरत नहीं होती और यह 5 से 7 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है। इसमें एंटी एलर्जिक दवा (anti allergic medicine) दी जाती है, ताकि मरीज को आराम मिले। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे (gargle with salted warm water) आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ (warm liquid products) का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। तुरंत गर्म से ठंडे में और ठंडे से गर्म में न जाएं, अन्यथा इससे इस संक्रमण की गिरफ्त (caught in infection) में आ सकते हैं।

हाइपोथर्मिया– Hypothermia

सर्दियों (in winters) में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया (hypothermia) कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ (problem in breathing) होती है। हार्ट बीट बढ (heart beat increases) जाती है, बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मृत्यु (can cause death) भी हो सकती है। तेज ठंड का सामना (Avoid) न करें।

SEMrush

टॉन्सिलाइटिस– Tonsils

बच्चों में पाई जाने वाली यह आम समस्या (normal problem) भी टॉन्सिल में संक्रमण (infection) के कारण होती है। गले में काफी दर्द (pain) होता है। खाना खाने में दिक्कत (problem) होती है, तेज बुखार (high fever) भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण (viral infection) से हो सकता है।  इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों (avoid cold things) का प्रयोग करने से बचें। गर्म भोजन और गुनगुने पानी (use warm water) का प्रयोग करें।

यह भी पढ़ें :- जानिये लिवर रोग के लक्षण और उसके बचाव के बारे में |

अस्थमा– Asthma

यह एक एलर्जिक बीमारी (allergic disease) है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है, इस मौसम में उनकी (increase their problem) तकलीफ बढ़ जाती है। सर्दियों में कोहरा (fog increases) बढ़ जाता है। एलर्जी के तत्व (allergic elements) इस मौसम में कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। इन तत्वों से अस्थमा के रोगियों (asthma patients) को अधिक तकलीफ होती है। इस कारण इस मौसम (atmosphere) में ऐसे लोगों के लिए धूल-मिट्टी से बचना बहुत जरूरी है। दवा खा रहे हैं तो उसे नियमित रूप (take it regularly) से लें। कोई दवा चूकें नहीं, क्योंकि ऐसे में एलर्जेट अटैक (allergic attack) कर सकते हैं।

बेल्स पाल्सी– Bails Palsi

इसे फेसियल पेरालिसिस (facial paralysis) कहते हैं। यह सर्दियों में बड़ा सामान्य (normal) है। इसमें मुंह टेड़ा हो सकता है, आंख खराब (eyes can be infected) हो सकती है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस (7th cronical veins) गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ (shrink) जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। इसमें मुंह (mouth) टेड़ा हो जाता है, मुंह से झाग निकलने लगता है, बोलने में जबान लड़खड़ाने लगती है और आंख से पानी (Water from eyes) आने लगता है। अगर आप लंबे समय (long time) तक ठंड में हैं तो कान की उस नस (vein of ear) को नुकसान हो सकता है। खासकर ड्राइविंग (driving) करने वालों, रात में बिना सिर को ढके कहीं जाने वालों में इसका खतरा (danger increases) बढ़ जाता है, इसलिए मफलर का (use muffler) प्रयोग करें, गाड़ी के शीशे बंद रखें।

रूखी त्वचा– Dry Skin

सर्दियों में अधिक कपड़े पहनने (wearing extra clothes in winter) से शरीर को मॉइश्चर नहीं मिलता, जिससे त्वचा ड्राइ (dry skin) हो जाती है। इससे वे फटने (cut) लगती हैं। त्वचा को ड्राइ होने से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर (moisturizer) जरूर लगाएं। त्वचा को ड्राइनेस से बचाने (safe from dryness) के लिए मलाई या तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। होठों में भी यह (problem on lips) समस्या आती है, इस मौसम में। इसके लिए घरेलू दवाएं (home remedies) या अपने डॉक्टर से सलाह (consult from doctor) लेकर दवा ले सकते हैं।

घरेलू नुस्खे , home remedies in hindi, herbal medicine in hindi, natural remedies in hindi, alternative medicine in hindi, natural medicine in hindi

Loading...

Loading...
, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *