जानिये क्या है महिलाओं के बारे में पुरुषों के मन में कुछ गलतफहमियां | Jaaniye kya hai mahilao ke bare mein purusho ke mann mein kuch galatfahmiya

Relation- Family ke Nuskhe

जानिये क्या है महिलाओं के बारे में पुरुषों के मन में कुछ गलतफहमियां | Jaaniye kya hai mahilao ke bare mein purusho ke mann mein kuch galatfahmiya

भारतीय परिवेश (indian culture) में ही नहीं कई अन्य देशो में भी (in some other countries) महिलाओं को लेकर दकियानूसी सोच (stupid views) देखने को मिलती है और गलतफहमियां भी और इन्हें लेकर कुछ मुहावरे और कुछ Quotes भी महान लोगो ने कहे है जो बेशक प्रचलित है लेकिन ऐसा नहीं है वो सच्चाई से भी वास्ता (no concern to reality) रखते है क्योंकि हम से कई तो केवल इसलिए उन बातों को अपनी बातचीत में शामिल करते है ताकि वाकपटुता के शहंशाह (kings of talking) बन सके | इनमे से कुछ बातें मैं आपसे साझा करना चाहूँगा (i want to share few things) जो हम मानते है लेकिन असल में ऐसा केवल महिलाओं के साथ ही होता है जरुरी नहीं है पुरुष भी ऐसा करते है तो फिर हम हर बात के लिए महिलाओं को ही दोष क्यों दें –

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इनके पेट में बात नहीं टिकती – inke pet mein baat nahi tik ti– मैंने अक्सर बुद्धिजीवी लोगो (smart peoples) को ये कहते सुना है कि ‘महान लोग कहते है महिलाओं से कुछ गोपनीय बाते शेयर नहीं करनी चाहिए (never share secret with womens) क्योंकि इनके पेट में वो टिकती नहीं या पचती नहीं है ‘ तो मैं आपको बताना चाहूँगा भारतीय परिवेश में अगर ऐसा मान भी ले तो कौन सी बड़ी बात है महिलाएं भावुक (indian womens are emotional) होती है और किसी बात के लिए इनको अगर कोई blame करता है तो बिना किसी सोच विचार के लिए मन का गुब्बार (frustration) निकाल देना चाहती है लेकिन क्या पुरुष वाकई ऐसा नहीं करते ? क्या पुरुष के पेट में सारी बाते पचती है क्योंकि ग़लतफ़हमी (misunderstanding) पैदा होने से होने वाले लडाई झगड़ो में 50 प्रतिशत योगदान तो पुरुषों (contribution of mens) का ही होता है और college life में होने वाले लडाई झगड़ों की मूल वजह होती है ‘इधर वाले पक्ष के बारे में उधर जाकर कोई न कोई बढा चढ़ा कर बोलता है ‘ ऐसे में क्या पुरुषो को इस मामले में पूरी तरह ईमानदार कहा जा सकता है ?

इनकी तो बातें ही खत्म नहीं होती – inki to baatein hi khatam nahi hoti– आप जरा अपने दिल पर हाथ रख कर सोचिये क्या गॉसिप केवल महिलाओं के लिए बना (is gossip made for womens only) विषय है ? मेरे बचपन के समय में मैंने हरियाणा के गाँव (in village of haryana) में लोगो को दोपहर के समय किसी पेड़ के नीचे बैठे हुक्के पीते पुरुषो और चाय की चुस्कियां (drinking tea) लेते इधर उधर की बातें करते हुए देखा है इसलिए कम से कम मैं तो नहीं मानता कि केवल महिलाएं ही गॉसिप करती है जबकि मैं तो ये मानता हूँ हर किसी को बातें करने का शौक होता है और लोग खुलकर बात कर चाहते है और ऐसे में महिलाओं से बेहतर श्रोता (you cant get better listner than woman) आपको दूसरा कोई आपको नहीं मिलेगा

तैयार होने में देर लगाती है – taiyaar hone meirn der lagati hai– आप कहते है कि महिलाएं तो तैयार होने में समय लेती है (womens taking time to ready) और ऐसे में आपको बहुत सारा इन्तजार करना पड़ता है लेकिन आप खुद सोचिये महिलाएं कितनी शिद्दत से घर की सारी जिम्मेदारियां निभाती है (womens working hard to her responsibilities) ऐसे में अगर वो थोडा बहुत समय लेती भी है तो इसमें गलत क्या है आप कहते है (whats wrong if she take some time) मुझे तो तैयार होने में इतना समय नहीं लगता है जितना मेरी बहन या पत्नी को लगता है तो आप ये बताएं क्या आप उनकी जगह होकर उनकी तरह जिम्मेदारियां निभा सकते है । जब आप अपने जीवासाथी चुनने के समय उनके look पहनावे को consider करते है तो उनके तैयार होने के समय में भी धर्य रखना (learn some patience) सीख सकते है ।

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गाड़ी अच्छे से नहीं चला सकती gadi acche se nahi chala sakti– आप देखते है कितने सारे accident होते है जिनके पीछे की वजह जानना भी आप पसंद नहीं करते या उन्हें चर्चा का विषय नहीं बनाते (not making topic to discussion) लेकिन अगर ऐसा होता है कि कोई महिला या कोई लड़की कितनी भी ठीक से गाड़ी चलाना जानती हो और ‘ किसी छोटी मोटी दुर्घटना का शिकार हो जाये तो आप उसे एक बहस का विषय बना लेते है कि महिलाओं को गाड़ी ड्राइव नहीं करनी चाहिए (womens dont know about driving) उन्हें तो ठीक से overtake करना भी नहीं आता या ये वो ,जबकि सच्चाई ये है महिलाएं पुरुषों की तुलना में कंही अधिक संयम से गाड़ी को ड्राइव करती है (driving with patience) और उनकी तुलना में कंही कम जल्दबाजी दिखाती है (not in hurry) इसलिए बहुत कम होता है कि कोई महिला ‘अपनी गलती ‘ या जल्दबाजी की वजह से किसी दुर्घटना का शिकार (victim of accident) होती है । अक्सर वो भीड़ भाड़ वाले इलाके की अपेक्षा जहा से ड्राइव कर गाड़ी ले जाना आसान हो वंहा से जाना पसंद करती है चाहे वो रास्ता उनके लिए कुछ लम्बा (it doesnt matter if the way is longer) ही क्यों न हो ।

घर को समय नहीं देती – ghar ko samay nahi deti– यह जुमला उन महिलाओं के लिए उपयोग में लिया जाता है जो अपने करियर में तरक्की कर लेती है (get promotion in carrier) आप कहते है कि ऐसा नहीं होना चाहिए । महिलाएं घर सँभालने के लिए बनी है (owmens made for caring the house and family) ऐसे में जॉब के साथ साथ वो घर को अच्छे से नहीं संभल सकती है और कुछ छोटी मोटी कमियों को भी हम अगर कोई बिगड़े बच्चे का उदाहरन देते है तो कहते है माँ बाप दोनों working है इसलिए घर (parents cant give to home) को समय नहीं देते लिहाजा बच्चे तो बिगड़ेंगे ही । जबकि ऐसा नहीं है अपने इस मामले में स्त्री से अधिक उदार कंही कोई नहीं देखा होगा । अगर fact ही जानना है तो एक चीज़ सोच के देखिये आप अलग अलग sectors में ऊँचे पदों पर काम कर रही महिलाओं को पढके सुनके उनके बारे में अच्छी अच्छी बातें बोलते है और महिला शशक्तिकरण (woman power/ entrepreneur) से मुद्दे के लिए उन्हें उदाहरण बनाते है तो सामान्य जिन्द्दगी में किसी working women के बारे में इतने क्रूर क्यों बनते है । कोई भी महिला अगर घर की जिम्मेदारियों की बात करें तो अपने परिवार के लिए जॉब छोड़ने का फैसला (can take decision to quit job) ले सकती है भले ही उसे अपने काम से कितना ही लगाव क्यों न हो जैसे “सचिन तेंदुलकर” की पत्नी ने अपने पति और घर की जिम्मेदारियों के लिए अपने प्रोफेशन का त्याग (leave the profession) कर दिया । क्या आप अपने male ego को भुलाकर ऐसा कर सकते है नहीं न ! तो इस बारे में तो बोलिए ही (than dont talk on this topic) मत ।

वो पुरुषो पर नियंत्रण रखती है -wo purusho par niyantran rakhti hai– आप कहते है महिलाएं तो पुरुषो पर काबू रखती है (womens controlling the mens) और तरह तरह के जुमले और joke whatsapp पर इसी बारे में शेयर किये जाते है जिसमे बेचारे पति को बड़ा ही मासूम (showing mens very innocent) दिखाया जाता है जबकि आप सोचिये अगर सच में ऐसा होता तो किसी महिला के साथ कभी rape या यौन शोषण जैसी घटना bad incidents) होती ,नहीं न ! क्या कोई महिला दहेज़ (dowry) जैसी बात के लिए प्रताड़ित होती ? क्या किसी भी महिला के साथ जोर जबरदस्ती होती ? सबका जवाब आप ना में देंगे तो फिर आप कैसे कह सकते है या कहते है कि कोई भी महिला पुरुष वर्ग पर नियंत्रण (than how can you say womens controlling the mens?) रखती है ।

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सच क्या है ?- sach kya hai ? – असल में कोई भी महिला या लड़की (मैं बेचारी नहीं कहूँगा) ढेर सारी सामाजिक मर्यादाओं के बोझ के तले दबी हुई (stuck between the family work out and dont have any personal life) निरंतर परिवार की जिम्मेदारियो का निर्वहन करती है । आप अपनी माँ या शादीशुदा बहन (see your mother or married sister, did they get time to enjoy life?) को ही ले लीजिये उन्हें कितना वक़्त मिलता होगा मौज मस्ती या अपने मन की करने के लिए ? उसके बाद भी बची खुची जिन्दगी को लोगो और परिवार वालो की अपेक्षाओं को पूरा करने में निकाल देती है और ऊपर से आपके लिए जुमले । कितनी वैचारिक क्रूरता है (cruel thinking) हमारे मन में महिलाओं के लिए और उसके बाद हम हामी भरते है ” महिला उत्थान ” जैसे विषयों पर ,लम्बे चौड़े भाषण (big speeches) देते है ज्ञान बांटते है ये करना चाहिए वो करना चाहिए और उसके बाद भी किसी महिला के आचरण (behavior of woman),पहनावे रहन सहन जैसी बातों का हम मजाक बनाते है इसलिए मैं कहना चाहता हूँ तमाम उन लोगो से जो ये सोचते है कि please अपनी सोच बदलिए और एक respectable atmosphere create करिए जिसमे महिलाओं के लिए भी वही सम्मान और समान स्तर हो जिसकी आप बातें करते है ।

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