एक ज़रूरी खबर, क्या आपको पता है के गंदी हवा आपका दिमाग जाम कर सकती है, इन नुस्खों से ऐसे बचें | Ek jaroori khabar, kya aapko pata hai ke gandi hawa aapka dimaag jam kar sakti hai, in nuskho se aise bache

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एक ज़रूरी खबर, क्या आपको पता है के गंदी हवा आपका दिमाग जाम कर सकती है, इन नुस्खों से ऐसे बचें | Ek jaroori khabar, kya aapko pata hai ke gandi hawa aapka dimaag jam kar sakti hai, in nuskho se aise bache

 

एक नई रिसर्च (research) में सामने आया है कि वायु प्रदूषण आपके दिमाग के लिए बेहद घातक साबित (air pollution is dangerous for brain) हो सकता है। ये न सिर्फ दिमाग की क्षमता पर असर डालता है बल्कि उससे जुड़ी कई बीमारियों (infections) की वजह भी हो सकता है। ब्रिटेन (Britain) की लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी (university) के एक विशेष दल ने अपनी शोध में ये चौंकाने वाले खुलासे किये हैं।

इस नए शोध के मुताबिक वायु प्रदूषण न सिर्फ आपके दिल और फेफड़ों (heart and lungs) के लिए बल्कि दिमाग के लिए भी बेहद खतरनाक है। इस रिपोर्ट (report) में दावा किया गया है कि ये दिमाग से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है। लैंकेस्टर विश्वविद्यालय  की प्रोफेसर ने बताया कि उन्हें रिसर्च के दौरान दिमाग के नमूने में वायु प्रदूषकों के लाखों कण मिले। उनके मुताबिक एक मिलीग्राम दिमाग के उत्तक में लाखों मैगनेटिक प्रदूषक (megnatic pollution) कण मिले हैं जिससे दिमाग को खतरा हो सकता है। इससे दिमाग के क्षतिग्रस्त होने की प्रबल संभावना (possibility) है।   

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सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाले प्रदूषण के कणों का बड़ा भाग तो श्वास की नली में जाता है लेकिन इसका एक छोटा हिस्सा स्नायु तंत्र से होते हुए दिमाग में भी पहुंचता है। उन्होंने कहा कि शोध के दौरान पता चला कि मैगनेटिक प्रदूषक कण दिमाग में पहुंचने वाली आवाजों और संकेतों (can stop sounds and signals of brain) को रोक सकते हैं, जिससे अल्जाइमर जैसी बीमारी हो सकती है। हालांकि अल्जाइमर के साथ इसके जुड़े होने की पुष्टि अभी पूरी तरह से नहीं हुई है।

2012 में 70 लाख लोगों की हुई मौत – 70 lakhs people died in year 2012

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (world health organization) के मुताबिक साल 2012 में दुनिया भर में हुई हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण ही था। खाना बनाने के दौरान चूल्हे और गाड़ी (gas and vehicle) से निकलने वाला धुआं करीब 70 लाख लोगों की मौत का कारण बना। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की प्रमुख के मुताबिक, “घर के भीतर और बाहर वायु प्रदूषण अब एक बड़ी समस्या (big problem) है और यह विकसित और विकासशील (growing and developed countries) दोनों तरह के देशों को प्रभावित कर रहा है।”

प्रदूषण के कारण जो घातक बीमारियां होती हैं, उनमें हृदय संबंधी रोग, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि दक्षिण एशिया (south asia) में भारत और इंडोनेशिया (india and Indonesia) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में है। वहीं पश्चिमी प्रशांत में चीन से लेकर दक्षिण कोरिया और जापान से लेकर फिलीपींस शामिल है। इन देशों में कुल 59 लाख लोगों की मौत हुई है।

घर के भीतर मुख्य रूप से कोयला (coal), लकड़ी (wood) और जैव इंधन स्टोव (stove) से खाना बनाने और अन्य कारणों से हुए प्रदूषण से 43 लाख लोगों की मौत हुई है। घर के बाहर होने वाले प्रदूषण में कोयले द्वारा ताप और डीजल इंजन (diesel engine) शामिल है। डब्ल्यूएचओ मुताबिक नए आंकड़े “चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं।” पिछली बार 2008 में जब डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण से मौत के अनुमान की रिपोर्ट जारी की थी, तब उसमें घर के बाहर होने वाले प्रदूषण के कारण 13 लाख लोगों की मौत और घर के अंदर प्रदूषण के कारण 19 लाख लोगों की मौत का जिक्र था। शोध प्रक्रिया में बदलाव (changes) के कारण 2008 के आकलन और 2012 के आंकड़ों में तुलना करना मुश्किल है।

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कैसे बचें इससे- how to save from this

 “जितना पहले सोचा या समझा गया था, वायु प्रदूषण के जोखिम उससे कहीं अधिक (more dangerous) हैं। खासकर हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए।” डब्ल्यूएचओ का कहना है कि गरीब देशों (poor countries) में करीब 2.9 अरब लोग ऐसे घरों में रहते हैं जहां खाना बनाने और ताप के लिए मुख्य रूप से आग का इस्तेमाल होता है। डब्ल्यूएचओ के सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के संयोजक कहते हैं कि इस तरह से घर “दहन कमरों” में तब्दील (transfer) हो जाते हैं। उनकी सलाह (suggestion) है कि इसके प्रभाव को कम करने के लिए सरल उपायों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इनमें ऐसे चूल्हें हैं जो कम तकनीक वाले होते हैं और साथ ही उनमें बेहतर वेंटिलेशन (ventilation) की सुविधा होती है।

देशों को अपनी नीतियों के बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है। उनका कहना है कि परिवहन नीतियों (change in transfer policies) में बदलाव लाना होगा। हाल ही में फ्रांस (france) ने वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए कारों पर पाबंदी लगा दी थी। साथ ही उसने पेरिस (peris) में सार्वजनिक परिवहन की फीस अस्थायी तौर पर माफ कर दी थी। इस तरह के उपायों को लंबे समय के लिए अपनाया जा सकता है. डब्ल्यूएचओ इस साल के आखिर में विश्व के सबसे प्रदूषित 1,600 शहरों की सूची (list of most polluted cities) जारी जारी करेगा।

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