लहसुन- मसाला भी और दवाई भी, Garlic- masala bhi aur dawai bhi
लहसुन- मसाला भी और दवाई भी, Garlic- masala bhi aur dawai bhi

लहसुन- मसाला भी और दवाई भी | Garlic- masala bhi aur dawai bhi

लहसुन- मसाला भी और दवाई भी | Garlic- masala bhi aur dawai bhi

 

लहसुन में कई छोटी-छोटी पुतियां होती हैं| इन पूतियों पर पतला खोल चढ़ा होता है| जब तक पूतियों पर यह खोल चढ़ा रहता है, तब तक यह खराब नहीं होतीं| लहसुन को अमृततुल्य बताया गया है क्योंकि इसमें काफी गुण होते हैं| यह शरीर में गरमी को बनाए रखता है, इसीलिए इसका प्रयोग शीतकाल (Winter) में अधिक किया जाता है| यह चेहरे पर चमक बढ़ाता है| इसको खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं| जो व्यक्ति नित्य इसका सेवन करते हैं, उनको शारीरिक व्याधियों से छुटकारा मिलता है| लहसुन उत्तेजक (excitement) और चर्मदाहक होता है| यह अपना प्रभाव (impression) शरीर के सभी अंगों पर छोड़ता है| इसको खाने से शरीर में रक्त का शोधन होता है और चुस्ती-फुर्ती आती है|

लहसुन में  सल्लीसिननामक तत्त्व पाया जाता है जिसकी गंध से कीटाणु (Germs) मर जाते हैं| यह धमनियों में खून जमने नहीं देता| कहा जाता है कि यदि लहसुन का प्रयोग नियमित रूप से किया जाए तो व्यक्ति को बुढ़ापा जल्दी नहीं आता| लहसुन की तासीर गरम होती है, परन्तु खाने के थोड़ी देर बाद इससे निकलने वाली गरमी अपने आप शान्त हो जाती है| यह बुद्धिदाता, वहम को दूर करने वाला तथा जीवन को प्राण-तत्त्व प्रदान करने वाला है|

इसके प्रमुख औषधीय उपयोग हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं –

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पेट दर्द ( Stomach Pain)
लहसुन की एक पूती, दो चुटकी सोंठ, आधा चुटकी काला नमक और दो दाने हींग – सबको पीसकर सेवन करने से पेट दर्द (stomach ache) रुक जाता है|

अजीर्ण
एक पूती लहसुन, दो दाने कालीमिर्च तथा दो चुटकी जीरा – सबकी चटनी बनाकर धीरे-धीरे खाने से अजीर्ण का रोग चला जाता है|

पेचिश (मरोड़)
दो पूती लहसुन, 3 ग्राम नीबू का रस, 5 ग्राम अदरक का रस, चार पत्तियां पुदीना (mint), एक चुटकी काला नमक और दो कालीमिर्च – सबको पीसकर चार खुराक बनाएं| दिनभर में चार बार इसका सेवन करने से पेचिश दूर हो जाएगी|

संग्रहणी
एक चम्मच जीरा, दो पूती लहसुन तथा एक चुटकी काला नमक (black salt)– तीनों को पीसकर मट्ठे के साथ सेवन करें| लगभग 8 दिनों तक यह नुस्खा प्रयोग करने से संग्रहणी समाप्त हो जाएगी|

गठिया
250 ग्राम दूध में लहसुन की दो पूतियां उबालकर कुछ दिनों तक सेवन करने से गठिया चला जाता है| लहसुन का तेल बनाकर शरीर पर मालिश भी करनी चाहिए|

हिस्टीरिया
लहसुन की दो पूतियां पीसकर घी में भून लें| इसके बाद इसमें थोड़ी-सी सोंठ तथा पीपरामूल का चूर्ण मिलाएं| प्रतिदिन (Everyday) एक चम्मच चूर्ण सुबह के समय खाने से हिस्टीरिया का रोग जाता रहता है|

लकवा (पक्षाघात)
250 ग्राम लहसुन को एक किलो सरसों के तेल में कड़ाही में औटाएं| जब तेल अच्छी तरह पक जाए तो उसे उतारकर ठंडा कर लें| इस तेल से रोगग्रस्त स्थानों की मालिश करें|

मधुमेह (Sugar)
प्रतिदिन चौथाई चम्मच नीम की पत्तियों के रस में दो बूंद लहसुन का रस मिलाकर सेवन करने से मधुमेह (sugar) का रोग जाता रहता है|

सूजन (Swelling)
हल्दी और लहसुन – दोनों को पीसकर सूजन वाले स्थान पर बांधने से सूजन (swelling) चली जाती है| दिल की खराबी से होने वाली सूजन के लिए दो पूती लहसुन, अर्जुन की छाल, साठी की जड़ एवं त्रिफला का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाएं|

नजला (जुकाम) (Cough)
लहसुन को कुचलकर खाने तथा बार-बार सूंघने से नजला या जुकाम कम हो जाता है|

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दमा (श्वास रोग)
लहसुन की 8-10 पूतियों को आग में भूनकर पीस लें| इस चूर्ण में सोमलता, कूट, बहेड़ा, मुलहठी और अर्जुन की छाल का समभाग चूर्ण मिलाएं| फिर एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन शहद (eat with honey) के साथ सेवन करें|

फ्लू ( Fever)
एक पूती लहसुन, चार पत्ती तुलसी, चार दाने कालीमिर्च और एक चुटकी सेंधा नमक – सबका काढ़ा बनाकर पीने से फ्लू शान्त हो जाता है|

दाद-खाज (Allergy)
लहसुन को भूनकर पीस डालें| फिर इसमें घी मिलाकर दाद-खाज पर लगाएं| अवश्य लाभ होगा|

मुंह के छाले
लहसुन की दो कलियां कुचलकर एक गिलास पानी में औटाएं| फिर इस पानी को ठंडा (cold water) करके दिनभर में तीन-चार बार कुल्ला करें| मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे|

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