जानिये क्या है 10 बहाने फिट न रहने के , jaaniye kya hai 10 bahane fit na rehne ke
जानिये क्या है 10 बहाने फिट न रहने के , jaaniye kya hai 10 bahane fit na rehne ke

जानिये क्या है 10 बहाने फिट न रहने के – jaaniye kya hai 10 bahane fit na rehne ke

जानिये क्या है 10 बहाने फिट रहने के – jaaniye kya hai 10 bahane fit na rehne ke

समय नहीं ((don’t have time) है, उम्र हो चली है, जोड़ों का दर्द परेशान  (problem in joints) करता है, मोटी हूं, दुबली हूं.. फिटनेस के लिए समय न  निकालने के हजारों (thousands of excuses) बहाने हैं। हेल्थ और फिटनेस (health and fitness) वह गिफ्ट है, जो सिर्फ हम खुद को देते है.

संकल्प बनते हैं, टूट जाते हैं। अपनी नाकामी (unsuccessful) के लिए हम सौ बहाने (1oo excuses) बनाते हैं। हेल्दी लाइफस्टाइल (healthy lifestyle) की बात हो तो बहाने हजारों होते हैं। इस किंतु-परंतु के बीच जिंदगी की गाडी (life circle) चलती जाती है। अचानक झटका खाकर गाडी (when stops suddenly) रुकती है, तो समझ आता है कि इसे तो सर्विसिंग की जरूरत (need servicing) थी और हम वर्षो (years) से इसे यूं ही खटा रहे थे। शरीर, मन और आत्मा (body, mind and soul) तीनों का स्वस्थ (healthy) रहना जरूरी है। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी ईधन (oil) है- संतुलित आहार, व्यायाम (exercise), ध्यान और योग। फिटनेस के ये गुरुमंत्र (fitness guru mantra) पुरुषों-स्त्रियों के लिए समान रूप से अनिवार्य (compulsory) हैं, मगर उन्हें न मानने के बहाने बडे अजीबोगरीब होते हैं। खासतौर पर स्त्रियों के बहाने..।

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  1. समय कहां है – Don’t Have Time

स्त्रियों के लिए यह सबसे बडा (big excuse) बहाना है। सुबह वॉक-एक्सरसाइज? अरे समय कहां है! बच्चों को स्कूल (childrens school) जाना है, पति को ऑफिस (husband office) और घर के सारे काम भी तो सुबह ही होते हैं। यह अलग बात है कि फोन (phone) पर वे काफी देर (talking long) बात कर सकती हैं। पेरेंट्स मीटिंग (parents meeting) में जाना हो, हज्बैंड को सुबह-सुबह ट्रिप (morning trip) पर निकलना हो या फिर कोई (some emergency) इमरजेंसी। इनके सारे बहाने खत्म (all excuses finishes) हो जाते हैं और ये हर काम करके घर (house) से निकल जाती हैं। जरा सोचें, जिस शरीर (body) के बल पर दुनिया (world) के हर काम कर रहे हैं, क्या उसके लिए आधा घंटा (half hour) भी हमारे पास नहीं है?

  1. एक्सरसाइज बोरिंग है – Exercise is Boring

यकीनन, रोज-रोज एक ही पार्क (park) के ट्रैक पर (jogging on track) जॉगिंग करना, एक जैसे व्यायाम करना बोरिंग (exercise is boring) होता है। इस दिनचर्या (daily routine) में बदलाव (change) जरूरी है। हफ्ते में दो-तीन दिन वॉक (walk) करें। इसके अलावा साइक्लिंग (cycling), बैडमिंटन (badminton), डांसिंग, स्विमिंग (swimming), योग, स्ट्रेचिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (strength training) जैसे कई विकल्प (option) हैं। हफ्ते में पांच दिन रोज कम से कम (atleast) 60 मिनट्स अपने लिए निकालें। दो दिन आराम (rest for 2 days) करें। जॉगिंग पसंद न हो तो ब्रिस्क वॉक (brisk walk) करें। ब्रिस्क वॉक न सही, यूं ही पैदल (simple walk) चलें, फायदा तो होगा।

  1. कमर में दर्द है – Pain in Back

ये बडा कॉमन (common excuse) बहाना है। कमर दर्द होने का अर्थ यह नहीं कि चलना-फिरना (stop walking) तक छोड दें। हां, ऐसे में हेवी एक्सरसाइज (heavy exercise) वर्जित हैं लेकिन नॉर्मल रुटीन (normal routine) के काम किए जा सकते हैं। पैदल चलना सबसे सुरक्षित (safest trick) उपाय है। अगर स्पाइन (spine) से जुडी कोई गंभीर समस्या जैसे स्लिप डिस्क (slip disk) नहीं है तो सामान्य कमर दर्द में नियमित काम (regular work) करने और हलका-फुलका व्यायाम (light exercise) करने से लोअर बैक को आराम (relief to lower back) मिलता है। अपने फिजियोथेरेपिस्ट (physiotherapy) या डॉक्टर (doctor) की सलाह से स्ट्रेचिंग टिप्स (stretching tips) भी ले सकती हैं।

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  1. उम्र का असर है – Age Effect

उम्र (age) भी अकसर बहाना (excuse) बन जाती है। 40 पार पहुंची नहीं कि इस लोक से ज्यादा परलोक की चिंता (stress of heaven) सताने लगती है। सच यह है कि 40 तो सिर्फ एक नंबर है। उम्र के बारे में लगातार सोचने से शरीर से ज्यादा (thoughts feeling restless) मन थकता है, जो वाकई बुरी स्थिति (bad situation) है। चलने-फिरने (walking) और सामान्य वर्कआउट (regular workout) करने के लिए शरीर कभी बूढा (body never be old) नहीं होता। ऐसे में नानी-दादी को याद करें, जीवन के आखिरी समय (last time) तक भी वे नियमित कामकाज (working regular) करती थीं न!

  1. अकेले वॉक कैसे करूं – How Should I Walk Alone

अकेले वॉक (walking alone) या जिम (gym) जाना भी स्वस्थ जीवनशैली से बचने (excuse f not doing workout) का एक बहाना बनता है। यह सच है कि पार्टनर के साथ वॉक (walking with partner) या एक्सरसाइज (exercise) से अधिक फायदा (more benefit) होता है। पति को समय न हो तो किसी दोस्त को प्रेरित (motivate any friend) करें। साथ वॉक (walk or exercise) या एक्सरसाइज करने से थकान कम (less restless) होती है और बोरियत भी (not feeling bore) नहीं होती। पार्टनर के साथ वॉक या एक्सरसाइज (walk or exercise with partner) से समय का पता नहीं चलता और फिटनेस रुटीन (fitness routine) के लिए थोडा ज्यादा समय निकल सकता है।

  1. मैं मोटी हूं – I Am Fatty

अब यह फैट कम (cant reduce fat) नहीं होगा, शर्म महसूस (feeling embarrassed) होती है बाहर निकलने में.., यह बहाना बडा (common excuse) आम है। उम्र के साथ शरीर में फैट (fat) का जमाव अस्वाभाविक बात नहीं है। लेकिन इस फैट को बहाना बनाने का अर्थ (meaning) है, शरीर को और बेडौल (bad shape) बनाते जाना। फैट ज्यादा हो तो थकान (feeling fatigue) जल्दी लगती है। इसलिए शुरुआत (starting) सिर्फ 15 मिनट की वॉक से करें। मोटापे को कम करने के लिए वर्कआउट (workout) के साथ डाइट को बैलेंस (balance) रखना भी जरूरी है। जिम (gym) से लौट कर अगर घी के स्टफ्ड पराठे (stuffed parantha) खा लेंगे तो इसका कोई असर (no effect) नहीं होगा। इससे अच्छा है, एक्सरसाइज से आधे घंटे पहले कोई स्मॉल या मीडियम साइज फ्रूट (eat fruit before exercise) खा लें और व्यायाम के एक घंटे बाद तक कुछ न खाएं।

  1. मैं तो पहले ही दुबली हूं – I Am Already Thin

यह भी बडा आम बहाना है। दुबली (thin) होने का मतलब यह नहीं कि शरीर को व्यायाम (body does not need exercise) की जरूरत नहीं है। दुबले होने का मतलब यह भी नहीं है कि शरीर (body is fit) फिट है। वर्कआउट सिर्फ वजन घटाने (not just for loosing weight) के लिए नहीं होता, यह शरीर और मन को ऊर्जा (giving energy to body and mind) देता है, उसे डिटॉक्सीफाई (detoxify) करता है। दुबली, सामान्य, मोटी..हर बॉडी टाइप (every body type) को सामान्य वर्कआउट (general workout) की जरूरत है।

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  1. बच्चा छोटा है – Kid is Younger

प्रसव (pregnancy) के बाद स्त्रियां (womens) तेजी से मोटी होती हैं। इसका प्रमुख कारण (main reason) है कि उन्हें अपने लिए समय नहीं (cant get time) मिल पाता। हॉर्मोनल बदलाव (hormone changes) होते हैं और नींद (sleep) भी पूरी नहीं होती। लेकिन जब बच्चा 3-4 महीने का हो जाए तो उसके रुटीन के हिसाब से (as per routine) अपना रुटीन तय करना बहुत जरूरी है। घर में सपोर्ट सिस्टम (support system at home) है तो बच्चे को कुछ समय छोड कर वॉक या एक्सरसाइज (walk or exercise) कर सकती हैं। कोई नहीं है तो भी बच्चे को प्रैम (prime) में लेकर निकल सकती हैं। बच्चे को भी अच्छा महसूस (child will also feel good) होगा और मां को भी ताजगी (mother also feel freshness) मिलेगी।

  1. मुझे आथ्र्राइटिस है – I had Arthritis

व्यायाम (exercise) कैसे होगा, आथ्र्राइटिस की प्रॉब्लम (problem) है..यह बहाना भी स्त्रियां (womans) बनाती हैं। हकीकत (reality) यह है कि इस समस्या में वॉक व वर्कआउट (no loss from workout) से नुकसान नहीं, फायदा (benefit) होता है। स्ट्रेंथनिंग, स्ट्रेचिंग (stretching) और एरोबिक्स (aerobics) से मसल्स मजबूत (strong muscles) होती हैं और जोडों पर दबाव (less stress on joints) कम होता है। एक्सरसाइज (exercise) से अतिरिक्त चर्बी कम (reduces extra fat) होती है, जिससे दर्द में भी आराम (relief from pain) मिलता है। नए शोध (research) कहते हैं कि आथ्र्राइटिस, कैंसर सर्वाइवर्स (cancer survivors), स्ट्रोक पीडित (stroke effected) सहित पार्किसंस जैसी बीमारियों में एक्सरसाइज से (benefit from exercise) फायदा होता है। लेकिन इसके लिए पहले डॉक्टर या िफजियोथेरेपिस्ट (consult doctor or physiotherapist) की सलाह जरूर लें, ताकि कोई ऐसी एक्सरसाइज (no exercise till then) न करें, जिससे नुकसान (it can hurt you) हो सकता हो।

  1. घर के काम काफी हैं – Too Much Work at Home

यह सही है कि घरेलू काम (house work) करने से वर्कआउट (workout) होता है, लेकिन जब ये रुटीन (routine) में आ जाते हैं तो इनका अपेक्षित लाभ (not much benefit) नहीं मिल पाता। जिस तरह व्यायाम में थोडा (change is important in exercise) बदलाव जरूरी है, उसी तरह घरेलू कामकाज के साथ वॉक (walk), जॉगिंग (jogging), योग (yog), ध्यान (meditation) करने से शरीर को ज्यादा लाभ (more benefit) मिलता है। इसलिए बहाने छोडें (avoid excuses) और तैयार हो जाएं (ready for workout) वर्कआउट के लिए।

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