एक लघु कथा - फरक लड़कों और लड़कियों कि आज़ादी में , Short Story - Difference Between Boys and Girls
एक लघु कथा - फरक लड़कों और लड़कियों कि आज़ादी में , Short Story - Difference Between Boys and Girls

एक लघु कथा – फरक लड़कों और लड़कियों कि आज़ादी में – Short Story – Difference Between Boys and Girls

एक लघु कथाफरक लड़कों और लड़कियों कि आज़ादी में – Short Story – Difference Between Boys and Girls

एक संत (saint) की कथा में एक बालिका खड़ी (girl stands) हो गई।
चेहरे (face) पर झलकता आक्रोश (anger)…

संत ने पूछा – बोलो बेटी (say daughter) क्या बात है?

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बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज (our culture) में लड़कों को हर प्रकार की आजादी (freedom) होती है।
वह कुछ भी (whatever they do) करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत (opposite) लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है।
यह मत करो (don’t do thing), यहाँ मत जाओ (don’t do that), घर जल्दी आ जाओ आदि।

संत मुस्कुराए (Saint smiles) और कहा…

बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान (iron shop) के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी (winter), गर्मी, बरसात (rainy), रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं।
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत (no difference on value) पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच (thinking like this) है समाज में।

अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप (jewelry shop) में।
एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी।
उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी (beautiful box) में रेशम पर नज़ाकत से रखा (shining diamond) चमचमाता हीरा।
क्योंकि जौहरी (jeweler) जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच (spot) आ गई तो उसकी कोई कीमत (no value) नहीं रहेगी।

समाज (society) में बेटियों की अहमियत (value) भी कुछ इसी प्रकार की है।
पूरे घर को रोशन (shine the whole house) करती झिलमिलाते हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के (nothing left for family/home) पास कुछ नहीं बचता।

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बस यही अन्तर (difference) है लड़कियों और लड़कों में।

पूरी सभा में चुप्पी (silence) छा गई।
उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई (tears in everyone’s eyes) नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे (difference between iron and diamond) में फर्क।।।

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