अपनाए यह घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे मोतियाबिंद के उपचार के लिए- Ayurvedic Home Remedies for Motiabind
अपनाए यह घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे मोतियाबिंद के उपचार के लिए- Ayurvedic Home Remedies for Motiabind

अपनाए यह घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे मोतियाबिंद के उपचार के लिए- Ayurvedic Home Remedies for Motiabind

अपनाए यह घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे मोतियाबिंद के उपचार के लिए- Ayurvedic Home Remedies for Motiabind

मोतियाबिंद रोग (cataract disease) कई कारणों (lots of reasons) से होता है। आंखों में लंबे समय तक सूजन (swelling in eyes for long time) बने रहना, जन्मजात (by birth) सूजन होना, आंख की संरचना (lack of eye development) में कोई कमी होना, आंख में चोट (injury in eye) लग जाना, चोट लगने पर लंबे समय तक घाव (wound) बना रहना, कनीनिका में जख्म बन जाना, दूर की चीजें धूमिल (dizziness) नजर आना या सब्जमोतिया रोग होना, आंख के परदे का किसी कारणवश (cause of some reason) अलग हो जाना, कोई गम्भीर दृष्टि (serious eye weakness) दोष होना, लंबे समय तक तेज रोशनी (Strong light) या तेज गर्मी (working in heat) में कार्य करना, डायबिटीज (diabetes) होना, गठिया (arthritis) होना, धमनी रोग होना, गुर्दे में जलन (burning in kidney) का होना, अत्याधिक कुनैन का सेवन, खूनी बवासीर (piles) का रक्त स्राव अचानक बंद (bleeding stops sudden) हो जाना आदि समस्याएँ मोतियाति‍बिंद को जन्म (gives birth) दे सकती हैं।

यह भी पढ़ें :- जानिये अगर कुछ दिन नमक खाए तो इसका सेहत पर क्या असर पड़ेगा

यह भी पढ़ें :- यह है वो 8 विटामिन्स और मिनरल्स जो पर्याप्त है हाई ब्लडप्रेशर रोकने के लिए

मोतियाबिंद के प्रकार — Types of Cataract

रक्त मोतियाबिंद में सभी चीजें लाल (red), हरी (green), काली (black), पीली (yellow) और सफेद (white) नजर आती हैं। परिम्लामिन मोतियाबिंद में सभी ओर पीला-पीला नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे कि पेड़-पौधों में आग लग गई हो।

सभी प्रकार के मोतियाबिंद में आंखों के आस-पास की स्थिति भी (situation near eye is difference) अलग-अलग होती है। वातज मोतियाबिंद में आंखों की पुतली लालिमायुक्त, चंचल और कठोर (hard) होती है। पित्तज मोतियाबिंद में आंख की पुतली कांसे (copper) के समान पीलापन (yellowish) लिए होती है। कफज मोतियाबिंद में आंख की पुतली सफेद और चिकनी (white and smooth) होती है या शंख की तरह सफेद खूँटों से युक्त व चंचल होती है। सन्निपात के मोतियाबिंद में आंख की पुतली मूंगे या पद्म पत्र के समान तथा उक्त सभी के मिश्रित लक्षणों (mixture of symptoms) वाली होती है। परिम्लामिन में आंख की पुतली भद्दे रंग (rough color) के कांच के समान, पीली व लाल सी, मैली, रूखी और नीलापन (bluish) लिए होती है।

आयुर्वेद में हरड़ , बहेड़े और आमले – इन तीनों को त्रिफला (trifla) कहते हैं । यह त्रिदोषनाशक है अर्थात् वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों के कुपित होने से जो रोग उत्पन्न (infection grows) होते हैं उन सबको दूर करने वाला है । कभी-कभी स्वस्थ मनुष्यों (healthy peoples) को भी त्रिफला के जल से अपने नेत्र धोते रहना चाहिये ।

धोने की विधि – त्रिफला को जौ से समान (यवकुट) कूट लो और रात्रि के समय किसी मिट्टी (sand), शीशे (glass) वा चीनी (sugar) के पात्र में शुद्ध जल में (dip in pure water) भिगो दो । दो तोले वा एक छटांक त्रिफला को आधा सेर वा एक सेर शुद्ध जल में भिगोवो । प्रातःकाल (early morning) पानी को ऊपर से नितारकर छान लो । उस जल से नेत्रों (eyes) को खूब छींटे लगाकर धोवो । सारे जल का उपयोग (use water 1 time) एक बार के धोने में ही करो । इससे निरन्तर धोने से आंखों की उष्णता (heat), रोहे, खुजली (itching), लाली, जाला, मोतियाबिन्द (cataract) आदि सभी रोगों का नाश (kills all diseases) होता है । आंखों की पीड़ा (eye pain- दुखना) दूर होती है, आंखों की ज्योति (increases eye sight) बढ़ती है । शेष बचे हुए फोकट सिर पर रगड़ने से (rub on head) लाभ होता है ।

त्रिफला की टिकिया – Piece of Trifla

* त्रिफला को जल (mash with water) के साथ पीसकर टिकिया बनायें और आंखों पर रखकर पट्टी (bandage) बांध दें । इससे तीनों दोषों से दुखती हुई आंखें   (relief in eyes) ठीक हो जाती हैं ।

*  हरड़ की गिरी (बीज) को जल के साथ निरन्तर आठ दिन तक खरल  (continue for 8 days) करो । इसको नेत्रों में डालते रहने से मोतियाबिन्द रुक (cataract stops) जाता है । यह रोग के आरम्भ में अच्छा लाभ (good gain in start) करता है ।

* मोतियाबिंद की शुरुआती अवस्था (early stage) में भीमसेनी कपूर स्त्री के दूध (mash in milk) में घिसकर नित्य लगाने पर यह ठीक हो जाता है।

* हल्के बड़े मोती का चूरा 3 ग्राम और काला सुरमा 12 ग्राम लेकर खूब (mash it properly) घोंटें। जब अच्छी तरह घुट जाए तो एक साफ शीशी (clean bottle) में रख लें और रोज सोते वक्त अंजन की तरह आंखों (use in eyes) में लगाएं। इससे मोतियाबिंद अवश्य (sure relief in cataract) ही दूर हो जाता है।

* छोटी पीपल, लाहौरी नमक (salt), समुद्री फेन और काली मिर्च (black pepper) सभी 10-10 ग्राम लें। इसे 200 ग्राम काले सुरमा के साथ 500 मिलीलीटर गुलाब अर्क (extract of rose) या सौंफ अर्क में इस प्रकार घोटें (mix) कि सारा अर्क उसमें सोख (suck all extract) लें। अब इसे रोजाना आंखों (use daily on eyes) में लगाएं।

* 10 ग्राम गिलोय का रस (giloy juice), 1 ग्राम शहद (honey), 1 ग्राम सेंधा नमक (sendha salt) सभी को बारीक पीसकर रख लें। इसे रोजाना आंखों में अंजन की तरह प्रयोग करने से मोतियाबिंद (relief in motiabind) दूर होता है।

* मोतियाबिंद में उक्त में से कोई भी एक औषधि (herb) आंख में लगाने से सभी प्रकार का मोतियाबिंद धीरे-धीरे दूर हो जाता है। सभी औषधियां परीक्षित (all herbs are tested)हैं।

NOTE: ASK YOUR AYURVEDIC DOCTOR BEFORE USING…

यह भी पढ़ें :- कुछ ऐसी बीमारियां जो महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को प्रभावित करती हैं

यह भी पढ़ें :- आजमाएं मच्छरो को दूर भगाने के अयुर्वेदिक और कुदरती नुस्खे

कुछ खास हिदायतें – Some Special Suggestions

  1. मोतियाबिंद के रोगी को गेहूँ की ताजी रोटी (eat fresh wheat chapatti) खानी चाहिए। गाय का दूध (cow milk) बगैर चीनी का (drink without sugar) ही पीएँ। गाय के दूध से निकाला हुआ घी भी (eat cow’s ghee) सेवन करें। आंवले के मौसम में आंवले के ताजा फलों (eat fresh amla) का भी सेवन अवश्य करें। फलों में अंजीर व गूलर अवश्यक खाएं।
  2. सुबह-शाम (morning and evening) आंखों में ताजे पानी (fresh water) के छींटे अवश्य मारें। मोतियाबिंद के रोगी (cataract patient) को कम या बहुत तेज रोशनी में नहीं (never read in sharp light) पढ़ना चाहिए और रोशनी में इस प्रकार न बैठें कि रोशनी सीधी आंखों (straight light on eyes) पर पड़े। पढ़ते-लिखते समय रोशनी बार्ईं (left side) ओर से आने दें।
  3. जो लोग उच्च निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) से प्रभावित (effected) होते हैं उनमें मोतियाबिंद का खतरा कहीं अधिक (more chances of cataract) होता है। डॉक्टर (doctor) के मुताबिक बचपन (childhood) में देखन की क्षमता का विकास (growth of visuality) होता और किशोरावस्था (young age) में आंख की लंबाई बढ़ती है लेकिन निकट दृष्टि दोष होने की वजह से यह कुछ ज्यादा ही बढ़ (increases more) जाती है। ऐसी स्थिति में आंख में जानेवाला प्रकाश रेटिना (not concentrate on retina) पर केंद्रित नहीं होता। इसी वजह से तस्वीर धुंधली (dizziness in picture) दिखाई देती है लेकिन इस दोष को कॉंटैक्ट लेंस (contact lens) या सर्जरी (surgery) से ठीक कराया जा सकता है।
  4. किसी व्‍यक्ति (person) को यह विकार यदि दोनों आंखों (both eyes) में हो गया है तो सर्जरी के जरिये आंखों में टेलीस्‍कोपिक लेंस (telescopic lens) प्रत्‍यारोपित (transplant) किया जाता है। टेलीस्‍कोपिक लेंस एक छोटी सी प्‍लास्टिक ट्यूब (plastic tube) की तरह दिखता है, सर्जरी के बाद यह आंखों की रोशनी (increase eye sight) बढ़ाता है। टेलीस्‍कोपिक लेंस प्रत्‍यारोपण के बाद यह दूर और नजदीक दोनों प्रकार के नेत्र विकारों (improves eye disorder) में सुधार करता है।

आयुर्वेदिक उपचार, घरेलू उपचार, gharelu nuskhe in hindi for health, alternative medicine in hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*